‘छिट-पुट’ बयान पर बवाल, बेटियों की सुरक्षा पर सवाल
“बेटियों की सुरक्षा पर सियासत नहीं, सख्त कार्रवाई जरूरी”: ‘छिट-पुट’ बयान पर बढ़ा राजनीतिक बवाल; जवाबदेही तय करने की मांग
पटना/नई दिल्ली: देश भर में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता और जन-आक्रोश अपने चरम पर है। ऐसे समय में आपराधिक घटनाओं पर जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार नेताओं द्वारा ‘छिट-पुट घटना’ जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देने को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष और आम नागरिक इसे ‘छिट-पुट सरकार’ का असली चेहरा बताते हुए सत्तापक्ष पर संवेदनहीनता का गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
हाल ही में जमुई (बिहार) समेत विभिन्न राज्यों में बेटियों के साथ हुई यौन उत्पीड़न और बदसलूकी की घटनाओं के बाद सामने आए इस प्रकार के बयानों ने जन-आक्रोश की आग में घी डालने का काम किया है।
बयानों पर घमासान: सुरक्षा और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल
बेटियों की सुरक्षा जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक लीपापोती को लेकर नागरिक समाज और विपक्षी दल हमलावर हैं:
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संवेदनहीनता का आरोप: जन-प्रतिनिधियों द्वारा जघन्य अपराधों को केवल एक ‘छिट-पुट घटना’ बताकर पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब तक अपराध की गंभीरता को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक अपराधियों में कानून का खौफ कायम नहीं हो सकता।
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सरेराह सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न: कोचिंग, स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों से लौटने वाली बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? जब जवाबदेही से बचने के लिए हर गंभीर वारदात को मामूली आंकने की कोशिश होती है, तो इससे असामाजिक तत्वों के हौसले और बुलंद होते हैं।
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त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग: सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक मांग उठ रही है कि बयानों के बजाय धरातल पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट जैसी कठोर धाराओं के तहत बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए।
संस्थागत जवाबदेही और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की आवश्यकता
महिला सुरक्षा केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के संविधान और नागरिक अधिकारों का मूल स्तंभ है:
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अपराध पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’: किसी भी महिला या बेटी के साथ हुई बदसलूकी को ‘छोटा या बड़ा’ आंकने के बजाय उसे संविधान और कानून पर हमला माना जाना चाहिए।
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पुलिस प्रशासन की तत्परता: ऐसी घटनाओं पर तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से समयबद्ध सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ बेटियों की सुरक्षा, उनकी स्वतंत्रता और गरिमा का पूर्ण समर्थन करती है तथा प्रशासन व जन-प्रतिनिधियों से आग्रह करती है कि वे संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी और पूर्ण निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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