दिल्ली में इंटरनेट और मेट्रो बंदी पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, गृह सचिव ने दाखिल किया हलफनामा
“दिल्ली में इंटरनेट और मेट्रो बंदी पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की बिना शर्त माफी, गृह सचिव ने दाखिल किया हलफनामा”
विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय एवं न्यायिक मामले (ऑल राइट्स मैगजीन)
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था के नाम पर इंटरनेट सेवाओं और मेट्रो ट्रेनों के संचालन को रोके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांग ली है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन द्वारा सर्वोच्च अदालत में हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट किया गया है कि किन परिस्थितियों में यह कदम उठाना पड़ा था।
1. गृह सचिव के हलफनामे में क्या कहा गया?
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सुरक्षा और अफवाहों पर रोक का तर्क: सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में गृह सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए रायसीना हिल्स के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।
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न्यायालय से आदेश में संशोधन का अनुरोध: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने पिछले आदेश में जरूरी बदलाव करने का भी अनुरोध किया है। सरकार की ओर से मांग की गई है कि आपात स्थिति और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को देखते हुए भविष्य में प्रशासन को आवश्यकतानुसार इंटरनेट सेवाएं बाधित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
2. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और पृष्ठभूमि
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न्यायालय का निर्देश: इससे पहले 11 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया था कि दिल्ली में आम जनजीवन और आवागमन को प्रभावित करने के लिए मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बंद नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
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कानूनी और नागरिक अधिकार: इस मामले पर अदालत और सरकार के बीच चल रही तनातनी ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में आपातकालीन प्रशासनिक कदमों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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