श्रीमद्भागवत महापुराण विशेष: भगवान दत्तात्रेय के 16वें गुरु ‘मत्स्य’ से सीखें जिह्वा नियंत्रण और जीवन प्रबंधन के शाश्वत सूत्र
श्रीमद्भागवत महापुराण: भगवान दत्तात्रेय और उनके 16वें गुरु ‘मत्स्य’ से प्राप्त जीवन प्रबंधन का संदेश”
नई दिल्ली: सनातन संस्कृति के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान दत्तात्रेय के उपदेशों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दार्शनिक प्रसंग मिलता है। भगवान दत्तात्रेय ने राजा यदु के समक्ष अपने 24 प्राकृतिक गुरुओं का उल्लेख किया है, जिनसे उन्होंने जीवन के गूढ़ रहस्य और प्रबंधन के तत्व सीखे थे। इसी श्रृंखला में, श्रीमद्भागवत महापुराण के एकादश स्कंध में भगवान दत्तात्रेय ने अपने 16वें गुरु ‘मत्स्य’ (मछली) से प्राप्त शिक्षा का सुंदर वर्णन किया है।
1. रसनेंद्रिय (जिह्वा) का आकर्षण और जीवन पर संकट
भगवान दत्तात्रेय ने राजा यदु को उपदेश देते हुए बताया कि इस संसार में जीव को भव-बंधन में जकड़ने वाली समस्त ज्ञानेंद्रियों में रसना (जिह्वा) का आकर्षण सबसे अधिक दुर्जय (कठिनता से जीतने योग्य) और आलोडनकारी होता है। मनुष्य अपनी अन्य बाह्य इंद्रियों और विषयों पर तो विजय पा सकता है, किंतु यदि वह रस-लोलुपता (स्वादानुरागी) का दास बना रहता है, तो उसका सत्-असत् का विवेक और आत्म-संयम दोनों ही नष्ट होने के संकट में घिर जाते हैं।
इस प्रसंग में श्लोक के माध्यम से कहा गया है:
जिह्वायातिप्रमाथिन्या जनो रसविमोहितः।
मृत्युमृच्छत्यसद्बुद्धिर्मीनस्तु बडिशैर्यथा॥
अर्थात्, जिस प्रकार विवेक-शून्य मछली (मीन) केवल अपने स्वाद के आकर्षण के वश में होकर कांटे (बडिश) में लगे मांस-पिंड को निगल लेती है और अंततः अपनी ही मृत्यु का कारण बनती है, ठीक उसी प्रकार यह चंचल जिह्वा के स्वादों से सम्मोहित होकर विवेक-भ्रष्ट जीव अपने विनाश का मार्ग स्वयं प्रशस्त कर लेता है।
2. जीवन प्रबंधन का संदेश: संयम ही सुरक्षा है
मत्स्य (मछली) को गुरु बनाने का संदेश यह है कि मुमुक्षु (मोक्ष की इच्छा रखने वाले) साधक और सामान्य मनुष्य को यह बात भली-भांति समझ लेनी चाहिए कि इंद्रियों का सूक्ष्म से सूक्ष्म आकर्षण भी विवेक के अभाव में घोर बंधन और आत्यंतिक विनाश का कारण बन जाता है।
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संयम का महत्व: जीवन को सुव्यवस्थित रखने के लिए रसना और अन्य इंद्रियों पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है।
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सतर्कता: क्षणिक सुख या स्वाद के प्रलोभन में फंसकर अपने जीवन के विवेक को खो देना व्यक्ति के पतन का मार्ग बनता है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ सनातन संस्कृति, पौराणिक ज्ञान और जीवन मूल्यों से जुड़े ऐसे प्रेरणादायक प्रसंगों को निरंतर अपने पाठकों तक पहुँचाती रही है।
