शेखपुरा डीएम का औचक निरीक्षण

बिहार: शेखपुरा डीएम का अरियरी में औचक निरीक्षण; मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा, अफसरों को कड़ी फटकार और कार्रवाई के निर्देश

(शेखपुरा): बिहार के शेखपुरा जनपद के अरियरी प्रखंड में संचालित सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) शेखर आनंद बुधवार को अचानक औचक निरीक्षण पर निकले। इस दौरान डीएम ने फरपर, कमालपुर और रामपुर गांवों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान मनरेगा, नल-जल योजना और किसान पंजीकरण में भारी लापरवाही, अनियमितता और फर्जीवाड़ा उजागर होने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और उनके खिलाफ तत्काल कानूनी व विभागीय कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

निरीक्षण के दौरान हुए 5 बड़े खुलासे

  • फरपर गांव में घोर लापरवाही: डीहा पंचायत के अंतर्गत आने वाले फरपर गांव में जब डीएम मनरेगा कार्यस्थल (साइट) पर पहुंचे, तो वहां काम कर रहे किसी भी मजदूर के पास अनिवार्य जॉब कार्ड उपलब्ध नहीं था। इसके बाद जब उन्होंने मौके पर अटेंडेंस रजिस्टर (उपस्थिति पंजिका) की मांग की, तो उसमें भी भारी गड़बड़ी और विसंगतियां सामने आईं।

  • नल-जल योजना को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: वार्ड संख्या 1, 2 और 3 के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को घेरकर ‘हर घर नल का जल’ योजना की जमीनी हकीकत बताई। ग्रामीणों ने शिकायत की कि उन्हें नियमित रूप से पीने का पानी नहीं मिल रहा है। इस पर डीएम ने संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई और ग्रामीणों को जल्द से जल्द शुद्ध पेयजल सप्लाई सुचारू कराने का आश्वासन दिया।

  • कमालपुर में मिला डिजिटल हाजिरी का फर्जीवाड़ा: कमालपुर में जांच के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां एनएमएमएस (NMMS) ऐप पर जिन मजदूरों के नाम और उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की गई थी, वे धरातल से पूरी तरह गायब मिले। उनकी जगह पर कुछ दूसरे (फर्जी) लोग काम करते पाए गए, जिनके पास कोई जॉब कार्ड भी नहीं था। जिलाधिकारी ने इसे एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता करार दिया।

  • किसान पंजीकरण में भारी मिसमैच: रामपुर मौजा में कृषि विभाग की योजनाओं की जांच के दौरान पाया गया कि किसानों के नाम और उनके द्वारा प्रस्तुत की गई जमीन की रसीद के विवरणों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां (मिसमैच) हैं। इसमें सुधार न किए जाने पर डीएम ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।

लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज; डीएम के सख्त निर्देश

जिलाधिकारी शेखर आनंद ने मौके पर ही मौजूद आला अधिकारियों को इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े गाइडलाइंस जारी किए:

  1. विभागीय व कानूनी कार्रवाई: जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की देखरेख में यह वित्तीय गड़बड़ी और लापरवाही चल रही थी, उन पर अविलंब विभागीय जांच शुरू कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

  2. जियो-टैगिंग अनिवार्य: मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए अब हर साइट की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) फोटो अपलोड करना अनिवार्य होगा।

  3. डाटा सुधारने का अल्टीमेटम: किसान समन्वयकों को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना अनिवार्य रूप से कम से कम 10 किसानों का मिसमैच डेटा सुधारें। इस कार्य में ढिलाई बरतने वालों पर सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण दल में ये अधिकारी रहे मौजूद

इस औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ उप विकास आयुक्त (DDC), भूमि सुधार उप समाहर्ता, डीआरडीए (DRDA) निदेशक, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अरियरी, अंचलाधिकारी (CO), मनरेगा पीओ (PO) और किसान समन्वयक सहित जिला व ब्लॉक स्तर के कई मुख्य अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


रिपोर्ट: उमेश कुमार,शेखपुरा(बिहार)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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