शारदीय नवरात्र 2026: जानिए कन्या पूजन के सही नियम, शुभ संख्या और महत्व; 9 कन्याएं न मिलने पर क्या करें?

“शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व: जानें सही नियम, शुभ संख्या और पूजा विधि”

नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र का पावन पर्व आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के बाद, अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन (कंजक पूजन) का विशेष विधान है। मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का जीवंत स्वरूप मानकर उनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है।

1. कन्या पूजन की सही संख्या और उसका महत्व

शास्त्रों के अनुसार, कन्या पूजन में मुख्य रूप से 9 कन्याओं और 1 बटुक भैरव (बालक) को आमंत्रित करना सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। हालांकि, यदि किन्हीं कारणों से 9 कन्याएं न मिल पाएं, तो भी भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार विषम संख्याओं में पूजन कर सकते हैं:

  • 9 कन्याएं: यह माता दुर्गा के नौ स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) का प्रतीक है।

  • 7 कन्याएं: सात कन्याओं का पूजन मां कालरात्रि और अन्य शक्तियों की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

  • 5 कन्याएं: पांच कन्याओं का पूजन पांच देवियों के स्वरूप के रूप में किया जाता है।

  • 3 कन्याएं: तीन कन्याओं को त्रिदेवी—महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली—का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

  • 1 कन्या: यदि विषम परिस्थितियों में केवल 1 कन्या का पूजन संभव हो, तो यह भी माता के दिव्य स्वरूप का आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम है।

2. कन्या पूजन के मुख्य नियम एवं परंपराएं

  • आयु सीमा: कन्या पूजन के लिए 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की आयु की कन्याओं को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

  • बटुक भैरव की उपस्थिति: कन्याओं की संख्या चाहे जो भी हो, उनके साथ 1 बटुक भैरव (बालक) को जरूर आमंत्रित करना चाहिए, क्योंकि इनके बिना पूजन अधूरा माना जाता है।

  • स्वागत और सत्कार: घर आने पर कन्याओं के पैर धोकर उन्हें उचित आसन पर बैठाना चाहिए।

  • प्रसाद: इस दिन मुख्य रूप से हलवा, पूरी और काले चने का भोग प्रसाद के रूप में लगाया जाता है। पूजन के पश्चात कन्याओं को सामर्थ्य अनुसार उपहार और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है।

यदि इन नियमों और पूरी निष्ठा के साथ शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन किया जाए, तो माता रानी की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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