जलभराव और जनता की परेशानी पर उठते गंभीर सवाल

सुभाष नगर पुलिया बंद करना समाधान नहीं: जलभराव और जनता की परेशानी पर उठते गंभीर सवाल

बरेली: मानसून की बारिश शुरू होते ही बरेली को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के दावों की पोल एक बार फिर खुलती नजर आ रही है। विशेषकर सुभाष नगर पुलिया पर होने वाला भारी जलभराव अब स्थानीय जनता के लिए एक बड़ी मुसीबत और कड़े इम्तिहान का सबब बन चुका है। प्रशासन द्वारा जलभराव के दौरान पुलिया को आवागमन के लिए बंद कर देना किसी भी नजरिए से कोई स्थायी समाधान नहीं है। कोशिश यह होनी चाहिए कि जनता को इस नारकीय स्थिति से निजात दिलाने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाए जाएं।

जलभराव से बेहाल जनता: हर दिन का सफर बना सजा

सुभाष नगर और आस-पास के इलाकों को शहर के मुख्य हिस्सों से जोड़ने वाली यह पुलिया जलमग्न होने के कारण आम नागरिकों को बेहद कष्टकारी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है:

  • गाड़ियां खराब, आर्थिक नुकसान: पुलिया के नीचे कई-कई फीट पानी भर जाने के कारण वहां से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच पानी में ही बंद हो रहे हैं। इंजन में पानी घुसने से लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं, जिससे उन्हें मानसिक प्रताड़ना के साथ-साथ बड़ा आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।

  • दुर्घटनाओं का खतरा: गंदे और गहरे पानी के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते। आए दिन लोग अपनी मोटरसाइकिल या साइकिल सहित पानी में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए यह सफर जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

  • आवागमन ठप: पुलिया बंद होने से हजारों की आबादी को कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।

‘स्मार्ट सिटी’ के दावों पर पानी फेरती जमीनी हकीकत

बरेली को स्मार्ट सिटी का दर्जा तो मिल गया, लेकिन सुभाष नगर पुलिया जैसी बुनियादी और दशकों पुरानी समस्या का अब तक स्थायी समाधान न हो पाना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर बड़े सवाल खड़े करता है:

  • ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी: पुलिया के आस-पास का ड्रेनेज (निकासी) सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त है। बारिश के पानी को तेजी से पंप आउट करने या उसकी सही निकासी के लिए कोई आधुनिक और बड़ा नाला अब तक आकार नहीं ले पाया है।

  • सिर्फ बैरिकेडिंग लगाना समाधान नहीं: पानी भरते ही पुलिस और प्रशासन द्वारा पुलिया पर बैरियर लगाकर रास्ता रोक देना समस्या से मुंह मोड़ने जैसा है। यह जनता को राहत देने के बजाय उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देता है।

जनता की आवाज: क्या होना चाहिए स्थायी समाधान?

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने बेहद जरूरी हैं:

  1. अंडरपास में आधुनिक पंपिंग स्टेशन: पुलिया के नीचे एक हाई-कैपेसिटी ऑटोमैटिक वॉटर पंपिंग सिस्टम स्थापित किया जाए, जो पानी जमा होते ही उसे तुरंत खींचकर मुख्य ड्रेनेज लाइन में डाल दे।

  2. सड़क और ड्रेनेज का री-डिजाइन: रेलवे और नगर निगम को आपसी समन्वय बनाकर इस पूरे पैच के ड्रेनेज सिस्टम को नए सिरे से डिजाइन करना चाहिए, ताकि ऊपरी इलाकों का पानी पुलिया के नीचे आकर जमा न हो।

  3. वैकल्पिक मार्गों का सुदृढ़ीकरण: जब तक कोई ठोस निर्माण नहीं होता, तब तक आस-पास के संपर्क मार्गों को पूरी तरह गड्ढा मुक्त और सुगम बनाया जाए ताकि पुलिया बंद होने पर ट्रैफिक जाम न लगे।

प्रशासन को समझना होगा कि जनता टैक्स देती है और वह जलभराव के इस कष्ट से मुक्ति चाहती है। अधिकारियों को चैंबर से निकलकर धरातल पर इस गंभीर समस्या का त्वरित एवं स्थायी समाधान निकालना ही होगा।


बरेली: अमरजीत
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
 (एडिटर (Allrights Magazine)

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