पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल: ‘मॉर्निंग वॉक’ के दौरान हमला कानून-व्यवस्था की पोल खोलता है
लखनऊ/बरेली: समाज के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमले और असामाजिक तत्वों का बढ़ता हौसला लोकतंत्र के लिए एक बेहद चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर रहा है। हाल ही में प्रातःकाल ‘मॉर्निंग वॉक’ (Morning Walk) के दौरान एक निर्भीक पत्रकार साथी के साथ घटी सुरक्षा संबंधी घटना के बाद पत्रकार जगत और आम नागरिकों में भारी आक्रोश और चिंता की लहर है।
जनता और मीडिया जगत अब एक ही सवाल पूछ रहा है— “क्या अपने दिन की शुरुआत करने और स्वस्थ रहने के लिए सुबह की सैर पर निकला पत्रकार भी अब अपने ही शहर की सड़कों पर सुरक्षित नहीं है?”
‘मॉर्निंग वॉक’ और पत्रकारों पर लक्षित हमले: सुरक्षा तंत्र पर उठे सवाल
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे के दावों के बीच यह घटना कई तीखे सवाल खड़े करती है:
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सड़कों पर पुलिस गश्त का दावा बेअसर: सुबह के समय जब आम नागरिक और वरिष्ठ पत्रकार स्वास्थ्य लाभ के लिए निकलते हैं, तब असामाजिक तत्वों, सट्टेबाजों और भू-माफियाओं के गुर्गों का सक्रिय होना पुलिस सर्विलांस की पोल खोलता है।
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कलम पर वार करने की साजिश: अक्सर खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए ऐसे समय और एकांत स्थानों का चुनाव किया जाता है, जिससे उनकी आवाज को दबाया जा सके।
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जवाबदेही तय करने की मांग: पत्रकार संगठनों ने एक सुर में मांग की है कि घटना में शामिल दोषियों की तत्काल पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ की अपील: निर्भीक पत्रकारिता की रक्षा जरूरी
पत्रकार केवल समाचार नहीं लिखता, बल्कि वह समाज की विसंगतियों और प्रशासनिक कमियों को उजागर कर जनहित की रक्षा करता है। जब एक पत्रकार ही अपनी दिनचर्या के दौरान असुरक्षित महसूस करेगा, तो सत्य निष्पक्षता से सामने कैसे आएगा?
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सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई: सरकार और राज्य पुलिस प्रशासन को पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा ढांचा (Journalist Protection Protocols) लागू करना चाहिए।
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सहानुभूति और एकजुटता: ‘ऑल राइट्स मैगजीन’ अपने पीड़ित पत्रकार साथी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और पूर्ण सुरक्षा की कामना करती है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा ताकि हमारे पत्रकार साथी अब सुबह की सैर हो या देर रात का कवरेज, बिना किसी भय के सुरक्षित महसूस कर सकें।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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