SC: धर्म बदला तो खत्म होगा SC दर्जा

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदलते ही खत्म होगा SC-ST दर्जा, नहीं मिलेगा आरक्षण ⚖️

धर्मांतरण पर शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह जाएगा। जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि धर्मांतरण के साथ ही एससी दर्जा तुरंत और पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का हवाला 📜

न्यायालय ने अपने फैसले का आधार 1950 के संवैधानिक आदेश को बनाया है:

  • क्लॉज 3 की बाध्यता: कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश के खंड 3 में स्पष्ट है कि निर्दिष्ट धर्मों (हिंदू, सिख, बौद्ध) के अलावा किसी और धर्म को मानने वाला व्यक्ति एससी कोटे का लाभ नहीं ले सकता।

  • कोई अपवाद नहीं: अदालत ने कहा कि यह रोक पूरी तरह लागू होती है। जन्म की स्थिति चाहे जो भी रही हो, धर्म बदलते ही व्यक्ति वैधानिक लाभ, सुरक्षा या आरक्षण का दावा नहीं कर सकेगा।

  • एक साथ दो पहचान संभव नहीं: फैसले के अनुसार, कोई व्यक्ति एक साथ ईसाई या मुस्लिम धर्म का पालन करने के साथ-साथ अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर लगी मुहर 🏛️

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस निर्णय को सही ठहराते हुए सुनाया, जिसमें ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों के एससी दर्जा बरकरार रखने की मांग को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने माना कि सक्रिय रूप से दूसरे धर्म का पालन करने वाले लोग आरक्षण के हकदार नहीं हैं।

फैसले के प्रमुख बिंदु:

  1. धर्मांतरण: हिंदू, सिख, बौद्ध के अलावा अन्य धर्म अपनाने पर दर्जा समाप्त।

  2. आरक्षण का अंत: धर्मांतरण के बाद सरकारी नौकरियों या शिक्षण संस्थानों में कोटे का लाभ नहीं मिलेगा।

  3. कानूनी स्थिति: 1950 के संवैधानिक आदेश में किसी भी प्रकार का अपवाद स्वीकार्य नहीं है।


मुख्य जानकारी:

  • पीठ: जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया।

  • प्रभाव: ईसाई या इस्लाम अपनाने वाले पूर्व एससी सदस्यों पर सीधा असर।

  • कानून: संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के क्लॉज 3 की व्याख्या।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )


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