सरदार सिंह सूरी: सिनेमा से सेवा तक
फिल्मों से फकीरी तक: सरदार सिंह सूरी की अनोखी और प्रेरणादायक जीवन यात्रा
मुंबई: कुछ शख्सियतें अपनी कामयाबी से नहीं, बल्कि अपने जज्बे और निस्वार्थ सेवा से इतिहास लिखती हैं। सरदार सिंह सूरी उन्हीं में से एक थे, जिन्होंने फिल्मी दुनिया में सितारों को मंच दिया और बाद में इंसानियत की सेवा को ही अपना असली मिशन बना लिया। उनकी 7वीं पुण्यतिथि पर चार बंगला गुरुद्वारा साहिब में उमड़ा जनसैलाब इस बात का जीवित प्रमाण है कि सेवा की रोशनी कभी बुझती नहीं।
📌 जीवन के मुख्य पड़ाव और उपलब्धियां:
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फिल्मी सफर: एक सफल फिल्म निर्माता के रूप में उन्होंने पंजाबी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। उनकी फिल्म “एह धरती पंजाब दी” ने सामाजिक सौहार्द का बड़ा संदेश दिया।
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सितारों का साथ: इस फिल्म के जरिए प्रेम चोपड़ा जैसे दिग्गज कलाकारों को पहचान मिली, जबकि महान गायक मोहम्मद रफी की आवाज ने इसे अमर बना दिया।
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संघर्ष से सफलता: रावलपिंडी से विस्थापन और अंबाला में नई शुरुआत के बाद, उन्होंने मुंबई में एक टैक्सी ड्राइवर के रूप में भी जीवनयापन किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।
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सेवा का संकल्प: 1967 में उन्होंने गुरुद्वारे की नींव रखकर सेवा का जो बीज बोया, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।
इंसानियत का असली मिशन
सरदार सिंह सूरी की कहानी केवल पर्दे की सफलता तक सीमित नहीं थी। विस्थापन और संघर्ष के थपेड़ों ने उन्हें और अधिक संवेदनशील बनाया। उन्होंने महसूस किया कि असली सफलता वही है जो दूसरों के काम आए। आज उनके द्वारा स्थापित गुरुद्वारा धर्म, जाति और वर्ग के भेदभाव से परे रोज़ हजारों लोगों को भोजन, शिक्षा और सहारा प्रदान कर रहा है।

संकट में उम्मीद की किरण
कोरोना काल हो या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा, सरदार सिंह सूरी की विरासत के रूप में यह सेवा केंद्र हमेशा लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना रहा। वर्तमान में उनके बेटे जसपाल सिंह सूरी और मनिंदर सिंह सूरी इस महान विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
एक अमिट संदेश
सरदार सिंह सूरी का जीवन समाज को यह सिखाता है कि शोहरत और रूतबा अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन मानवता के लिए किया गया कार्य और निस्वार्थ सेवा युगों-युगों तक जीवित रहती है। वे सही मायने में सिनेमा और असल जिंदगी, दोनों के ‘असली हीरो’ थे।
मुंबई (अनिल बेदाग)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

