साहिल पेलेट गन से घायल: राहुल का हमला

साहिल के बदन पर ज़ख्म ही ज़ख्म”: जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई में छात्र घायल, राहुल गांधी का पीएम मोदी और दिल्ली पुलिस पर तीखा प्रहार


रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)

NEET-UG परीक्षा धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए साहिल नाम के एक युवा छात्र की स्थिति का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि हक और इंसाफ मांग रहे मासूम छात्रों पर पेलेट गन (Pellet Gun) और अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया है, जिसके कारण साहिल की एक आंख की रोशनी चली गई है और उसके शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।

“साहिल जैसे हजारों बच्चे पुलिस बर्बरता का शिकार”

राहुल गांधी ने पीड़ित छात्र साहिल का दर्द बयां करते हुए सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया:

“साहिल के बदन पर ज़ख्म ही ज़ख्म हैं, और एक आँख से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। क्यों? क्योंकि मोदी सरकार की दिल्ली पुलिस ने उसे पेलेट गन से निशाना बनाया — सिर्फ़ अपना हक़ और इंसाफ मांगने के लिए। दिल्ली पुलिस से चोट खाने वाले साहिल जैसे हज़ारों ऐसे और बच्चे हैं।”

विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें:

राहुल गांधी ने इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत हस्तक्षेप करने और सख्त कदम उठाने की मांग दोहराई है:

  1. प्रधानमंत्री से माफी की मांग: देश के भविष्य और निर्दोष छात्रों पर हुए अत्याचार को लेकर प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

  2. दोषी पुलिसकर्मियों पर सजा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट गन और लाठियां चलाने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए।

  3. शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की जिद: राहुल गांधी ने साफ किया है कि भले ही सरकार विभाग बदलने की बात करे, लेकिन पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पूर्ण बर्खास्तगी से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा।

जंतर-मंतर पर छात्रों का गुस्सा बरकरार

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक घायल छात्रों को न्याय नहीं मिलता और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज नहीं होती, तब तक आंदोलन की यह मशाल बुझने नहीं दी जाएगी।


सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

ALL rights magazine (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)


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