रायपुर स्मार्ट सिटी केस: KK श्रीवास्तव गिरफ्तार
रायपुर स्मार्ट सिटी ठेका धांधली: ED ने के.के. श्रीवास्तव को किया गिरफ्तार; कोर्ट ने 7 अगस्त तक कस्टडी में भेजा
विशेष राष्ट्रीय एवं अपराध ब्यूरो: रायपुर (छत्तीसगढ़)
प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने ₹500 करोड़ के फर्जी रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने के.के. श्रीवास्तव (कृष्णा कुमार श्रीवास्तव) को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत 30 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उसे 9 दिनों (07 अगस्त 2026 तक) के लिए ईडी की रिमांड पर भेज दिया है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए ₹15 करोड़ की ठगी
ईडी की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस (तेलीबांधा थाना, रायपुर) द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई थी:
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₹500 करोड़ के प्रोजेक्ट का झांसा: जून 2023 में के.के. श्रीवास्तव ने ‘M/s रावत एसोसिएट्स’ के प्रोपराइटर को फर्जी प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंट्स दिखाकर भरोसा दिलाया कि लगभग ₹500 करोड़ का ‘रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’ सब-कॉन्ट्रैक्ट के लिए उपलब्ध है।
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सिक्योरिटी मनी के नाम पर उगाही: परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के नाम पर आरोपी ने पीड़ित से ₹15 करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
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कर्मचारी के नाम पर सिम और फर्जी बैंक खाते: पैसे मंगाने के लिए अपने कर्मचारी के नाम पर ली गई सिम से व्हाट्सएप पर 5 बैंक खातों की जानकारी भेजी गई। जांच में यह सभी बैंक खाते फर्जी कागजातों के आधार पर खोले गए पाए गए और कोई भी शेल कंपनी अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं थी।
दुबई, हांगकांग और सिंगापुर भेजे गए ठगी के पैसे
ईडी की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग का बेहद चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सामने आया है:
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शेल कंपनियों के जरिए लेयरिंग: ठगी गई ₹15 करोड़ की राशि को कई फर्जी (Shell) कंपनियों के जरिए तेजी से ट्रांसफर किया गया।
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विदेश भेजे गए फंड्स: भाड़ा शुल्क (Freight Charges) और कंटेनर लीजिंग के झूठे व्यावसायिक बहाने बनाकर यह रकम दुबई (UAE), हांगकांग, चीन और सिंगापुर स्थित विदेशी खातों में भेज दी गई।
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फर्जी रिफंड: आरोपी ने पीड़ित को शांत रखने के लिए ₹3.40 करोड़ रुपये वापस भी किए थे, लेकिन जांच में पाया गया कि वह पैसा भी अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से ही लेयर करके दिया गया था, जबकि ₹11.60 करोड़ अभी भी गायब हैं।
छापेमारी में मिले अहम सुराग
इससे पहले अप्रैल 2025 में PMLA की धारा 17 के तहत की गई छापेमारी में ईडी ने हस्तलिखित लेन-देन के रिकॉर्ड, व्यक्तिगत डायरी, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल डिवाइसेस जब्त किए थे। पूछताछ के दौरान के.के. श्रीवास्तव ने जांच अधिकारियों को गुमराह करने और असहयोग करने का प्रयास किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने इसी तरह के फर्जीवाड़े के जरिए एक अन्य कारोबारी को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया था। ईडी फिलहाल आरोपी से कस्टडी में पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में जुटी है।
प्रादेशिक एवं क्राइम ब्यूरो: रायपुर (छत्तीसगढ़)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
रिपोर्ट: विशेष जांच एवं क्राइम ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, , दिल्ली

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