कोयंबटूर ब्लास्ट: ED की 15 जगह रेड
2022 कोयंबटूर बम ब्लास्ट और टेरर फंडिंग मामला: ED ने चेन्नई, मुंबई और हैदराबाद में 15 ठिकानों पर मारी रेड; फर्जी कोविड सर्टिफिकेट से रची गई थी ब्लास्ट की साजिश
विशेष राष्ट्रीय एवं अपराध ब्यूरो: चेन्नई / कोयंबटूर
प्रवर्तन निदेशालय (ED), चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय ने 2022 के चर्चित कोयंबटूर कार बम ब्लास्ट (Coimbatore Bomb Blast) और टेरर फंडिंग मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 30 जुलाई 2026 को चेन्नई, कोयंबटूर, मुंबई और हैदराबाद स्थित 15 आवासीय परिसरों में एक साथ व्यापक तलाशी (छापेमारी) अभियान चलाया।
ईडी की यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एफआईआर (FIRs) के आधार पर शुरू की गई है, जो 23 अक्टूबर 2022 को कोयंबटूर के ऐतिहासिक अरुलमिगु कोट्टई संगमेश्वर थिरुकोविल मंदिर के पास हुए आत्मघाती वीबी-आईईडी (VB-IED) विस्फोट से संबंधित है।
आईएसआईएस (ISIS) से प्रेरित था आत्मघाती हमलावर
जांच में खुलासा हुआ है कि इस आत्मघाती हमले को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी जमेषा मुबीन (Jamesha Mubeen) था, जिसने मौत से पहले कट्टरपंथी आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी।
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बदले की नीयत से हमला: मुबीन और उसके साथियों ने रेडिकल प्रचारक मोहम्मद अजरुद्दीन की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए यह हमला किया था। अजरुद्दीन धार्मिक कक्षाएं चलाकर युवाओं को भारत में आईएसआईएस के नेटवर्क को मजबूत करने और जिहाद के लिए भड़काता था।
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मद्रास अरबी कॉलेज का कनेक्शन: जमेषा मुबीन और मोहम्मद अजरुद्दीन सहित ब्लास्ट केस के सभी 12 आरोपी ‘मद्रास अरबी कॉलेज’ (कोवई अरबी कॉलेज) के प्रमोटर जमील बाशा (Jameel Basha) के छात्र थे। जमील बाशा अरबी पढ़ाने की आड़ में युवाओं में खिलाफत विचारधारा, सशस्त्र संघर्ष और हिंसा का जहर घोलता था।
फर्जी कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट घोटाले से जुटाए टेरर फंड्स
ईडी की जांच में टेरर फंडिंग (Terror Financing) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है:
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फर्जी सर्टिफिकेट का घोटाला: आरोपी व्यक्तियों ने अगस्त 2021 से जून 2022 के बीच एक फर्जी कोविड-19 वैक्सीन सर्टिफिकेट स्कैम चलाया। इसके तहत तमिलनाडु और मुंबई के उन लोगों से पैसे लेकर नकली वैक्सीन सर्टिफिकेट दिए गए जो बिना टीका लगवाए सर्टिफिकेट चाहते थे।
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बम बनाने का सामान खरीदा: इस फर्जीवाड़े (Proceeds of Crime) से कमाए गए पैसों का सीधा इस्तेमाल बम बनाने की सामग्री खरीदने और मद्रास/कोवई अरबी कॉलेज की गतिविधियों को चलाने के लिए किया गया था।
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चंदे के नाम पर फंडिंग: इसके अलावा जमील बाशा ने अपने पूर्व छात्रों और निवेशकों से चंदे के रूप में फंड जुटाया, जिसका इस्तेमाल ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, विदेश यात्राओं और अचल संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया।
डिजिटल डिवाइसेस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त
छापेमारी की कार्रवाई के दौरान ईडी ने संदिग्ध परिसरों से मोबाइल फोन, लैपटॉप जैसे कई डिजिटल उपकरण बरामद कर जब्त कर लिए हैं।
इसके साथ ही आरोपियों द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन, टेरर फंडिंग के नेटवर्क और अचल संपत्तियों में किए गए भारी निवेश से जुड़े कई अहम व आपत्तिजनक दस्तावेज भी सीज किए गए हैं। मामले में आगे की गहन जांच जारी है।
राष्ट्रीय ब्यूरो: चेन्नई (तमिलनाडु)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
रिपोर्ट: विशेष जांच एवं क्राइम ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, , दिल्ली


