श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व: अमृतसर के संस्थापक और सेवा के प्रतीक गुरु साहिब को नमन; जानिए उनके जीवन और दर्शन का महत्व
“सिख धर्म के चौथे गुरु, श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर नमन: अमृतसर के संस्थापक और सेवा-समर्पण के प्रतीक गुरु साहिब का पावन स्मरण”
विशेष सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
नई दिल्ली / अमृतसर: सिख परंपरा के चौथे गुरु और पवित्र श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) की नींव रखने वाले जगत गुरु श्री गुरु रामदास जी के पावन प्रकाश पर्व पर देश भर में उन्हें कोटि-कोटि नमन किया जा रहा है। गुरु रामदास जी का संपूर्ण जीवन मानवता, समानता, विनम्रता, आध्यात्मिकता और निस्वार्थ सेवा का एक अनुपम प्रतीक रहा है।
उन्होंने न केवल अमृतसर (अमृत सरोवर) शहर की स्थापना की, बल्कि समाज को एक ऐसा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र दिया, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का संदेश देता है।
1. श्री गुरु रामदास जी का जीवन और ऐतिहासिक योगदान
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अमृतसर की स्थापना (रामदास चक): गुरु जी ने एक ऐसे नगर की नींव रखी जो आगे चलकर सिख धर्म का आध्यात्मिक केंद्र बना। उनके द्वारा शुरू किए गए इस नगर को पहले ‘रामदास चक’ और बाद में अमृतसर के नाम से जाना गया।
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श्री हरमंदिर साहिब की नींव: विश्व प्रसिद्ध हरमंदिर साहिब की परिकल्पना और उसकी आधारशिला रखकर उन्होंने यह संदेश दिया कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं और इस पवित्र दरबार के द्वार जाति, धर्म या वर्ण के भेद के बिना हर एक व्यक्ति के लिए खुले हैं।
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सेवा और समर्पण की मूरत: गुरु साहिब की वाणी (गurbani) में दीन-दुखियों की सेवा, परोपकार, भगती और गुरु के प्रति अटूट समर्पण का जो संदेश मिलता है, वह आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है।
2. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: सिख गुरुओं के आदर्श और राष्ट्रीय एकता
सिख गुरुओं का इतिहास त्याग, बलिदान, मानवता और सर्वधर्म समभाव की उस महान परंपरा पर आधारित है, जो भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा है। श्री गुरु रामदास जी के उपदेश आज के आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में मनुष्य को आपस में जोड़ने, प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ देश की महान सांस्कृतिक विरासत, संतों-गुरुओं के विचारों और आध्यात्मिक धरोहर से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को पूरी श्रद्धा और प्रमाणिकता के साथ अपने पाठकों तक पहुँचाती है।
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