पंजाब में बिजली संकट पर सियासत गर्म

पंजाब में गहराता बिजली संकट: ’24×7 फ्री बिजली’ के वादे पर घिरी मान सरकार, सड़कों पर उतरे किसान और विपक्ष

विशेष रिपोर्ट:दीपक

चंडीगढ़/पटियाला: ‘मुफ्त और 24 घंटे निर्बाध बिजली’ का वादा कर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार इस समय पंजाब में उपजे गंभीर बिजली संकट के कारण विपक्ष और आम जनता के निशाने पर आ गई है। धान की कटाई-सिंचाई के ऐन मौके पर सूबे के कई जिलों में 8 से 10 घंटे तक लग रहे अघोषित पावर कट (Power Cuts) ने राज्य की कृषि, उद्योग और घरेलू जीवन को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है।

बिजली आपूर्ति ठप होने से उग्र हुए किसानों और विपक्षी दलों ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के मुख्यालयों पर मोर्चा खोल दिया है, जिससे भगवंत मान सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही है।

संकट की मुख्य वजह: थर्मल प्लांट ठप और 17,000 MW पार पहुंची मांग
पंजाब में गहराते इस ऊर्जा संकट के पीछे कई तकनीकी व प्रशासनिक कारण सामने आ रहे हैं:
थर्मल प्लांटों में तकनीकी खराबी और कोयला संकट: राजपुरा और तलवंडी साबो जैसे मुख्य थर्मल पावर प्लांटों में अचानक आई तकनीकी खराबी और आपूर्ति की कमी से लगभग 1,300 से 1,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया।
  • मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर: पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड मांग 17,000 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है, जबकि राज्य का अपना आंतरिक उत्पादन केवल 4,500 से 5,000 मेगावाट के आसपास सिमट कर रह गया है।     

  • प्रशासनिक सर्जरी: संकट गहराने के बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए मान सरकार ने आनन-फानन में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पीएसपीसीएल (PSPCL) के शीर्ष अधिकारियों के तबादले किए हैं।

    सड़कों पर किसान और विपक्ष: प्रदर्शनकारियों पर चले वाटर कैनन

बिजली संकट ने राज्य में एक बड़ा राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है:

किसानों का उग्र आंदोलन: भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) और किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के नेतृत्व में किसानों ने पटियाला, संगरूर और बठिंडा में प्रदर्शन किए। किसानों का कहना है कि धान की पकती फसल के समय बिजली न मिलने से फसलें सूख रही हैं और उन्हें मजबूरी में महंगे डीजल से ट्यूबवेल चलाने पड़ रहे हैं।
The Indian Express+ 2
  1. विपक्ष का जोरदार हमला: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में पटियाला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। शिरोमणि अकाली दल (SAD) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और भाजपा ने सरकार के ‘मुफ्त बिजली’ के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि सरकार ने पहले से कोई तैयारी नहीं की।   की सफाई: ‘जल्द सामान्य होगी स्थिति’

मामले पर सफाई देते हुए राज्य सरकार और ऊर्जा मंत्री का कहना है कि भीषण गर्मी, थर्मल यूनिट्स में आई अचानक खराबी और केंद्रीय पूल से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण यह अस्थायी संकट पैदा हुआ है। सरकार का दावा है कि पावर एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।

ऑल राइट्स मैगजीन’ का मानना है कि पंजाब जैसे कृषि-प्रधान और औद्योगिक राज्य में निर्बाध बिजली बुनियादी जरूरत है। चुनावी वादों के इतर सरकार को जल्द से जल्द पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त कर जनता को राहत पहुंचानी चाहिए।

BPSC और दरोगा भर्ती पर छात्रों का प्रदर्शन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: