बिहार में बाढ़ का कहर: सियासत तेज
बिहार में बाढ़ का प्रकोप: 12 से अधिक जिले जलमग्न, राहत और पुनर्वास की मांग के बीच सियासत गर्म
पटना: बिहार इस समय एक बार फिर मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के कारण विनाशकारी बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है। कोसी, गंडक, बागमती और गंगा जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों एकड़ में फैली फसलें जलमग्न हो चुकी हैं और लाखों लोग बेघर होकर ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
इसी बीच, प्रदेश में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति और प्रभावित इलाकों का हाल
उत्तरी और पूर्वी बिहार के ग्रामीण व निचले इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है:
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लाखों की आबादी प्रभावित: मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, पश्चिम चंपारण और कटिहार जैसे जिलों के सैकड़ों गांव पानी से घिर चुके हैं।
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बुनियादी सुविधाओं का संकट: प्रभावित इलाकों में शुद्ध पेयजल, राशन, तिरपाल और मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत महसूस की जा रही है।
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संक्रामक बीमारियों का खतरा: जलभराव वाले क्षेत्रों में महामारी और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रखने का भारी दबाव है।
राहत कार्यों और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर उठे सवाल
एक तरफ जहां बाढ़ पीड़ित जनता सरकारी मदद और त्वरित राहत पैकेज की बाट जोह रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन (17 सितंबर) के अवसर पर आयोजित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की घोषणा के बाद विपक्ष और आम जनता की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
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प्राथमिकता पर सवाल: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने और उत्सव मनाने की अपील को लेकर आलोचक सवाल उठा रहे हैं।
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जनता की मांग: विपक्ष का तर्क है कि जब बिहार का एक बड़ा हिस्सा जलप्रलय का सामना कर रहा है, तब सत्तारूढ़ दल के नेताओं की पहली प्राथमिकता उत्सव के अभियानों के बजाय जमीन पर उतरकर बाढ़ पीड़ितों तक सूखा राशन, दवाइयां और एनडीआरएफ (NDRF) की नावें पहुंचाने की होनी चाहिए।
तत्काल राहत और जवाबदेही की आवश्यकता
बिहार में हर साल आने वाली इस त्रासदी का स्थायी समाधान और आपदा के समय त्वरित सहायता ही राज्य की जनता की मूल जरूरत है। नेताओं और जनप्रतिनिधियों का पहला दायित्व संकट की इस घड़ी में बेघर हुए लोगों के साथ खड़े होना और उन्हें हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराना है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ सरकार और प्रशासन से अपील करती है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए और प्रभावित परिवारों तक सीधी मदद पहुंचाई जाए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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