पूनम ढिल्लों ने उठाई कलाकारों की आवाज

ग्लैमर के पीछे का कड़वा सच: कलाकारों के हक के लिए उतरीं पूनम ढिल्लों, टीवी इंडस्ट्री के शोषण पर उठाए गंभीर सवाल

रिपोर्ट: अनिल बेदाग

मुंबई: टीवी की चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे छिपे अंधेरे को उजागर करते हुए सिंटा (CINTAA) की प्रेसिडेंट और दिग्गज अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने कलाकारों के अधिकारों के लिए मोर्चा खोल दिया है। जर्नलिस्ट्स मीडिया एसोसिएशन महाराष्ट्र के कैलेंडर लॉन्च के मौके पर उन्होंने टीवी आर्टिस्टों, विशेषकर कैरेक्टर आर्टिस्टों के साथ होने वाले भेदभाव और संघर्ष की दास्तां बयां की।

90 दिन का इंतजार और बिना एग्रीमेंट का काम

पूनम ढिल्लों ने बताया कि टीवी इंडस्ट्री में छोटे कलाकारों की स्थिति चिंताजनक है:

  • पेमेंट का संकट: कलाकारों को आज भी काम करने के 90 दिनों बाद मेहनताना मिलता है।

  • एग्रीमेंट का अभाव: 1-2 दिन का रोल करने वाले कलाकारों से अक्सर प्रोड्यूसर्स एग्रीमेंट नहीं बनवाते, जिससे उनका पैसा डूबने का खतरा बना रहता है। ऐसे मामलों में ‘सिंटा’ को हस्तक्षेप कर प्रोड्यूसर्स पर दबाव बनाना पड़ता है।

12 घंटे की शिफ्ट और बुनियादी सुविधाओं में कटौती

पूनम ने शूटिंग के दौरान गिरते मानकों पर भी गहरी चिंता जताई:

  1. काम के घंटे: पहले शूटिंग शिफ्ट 8 घंटे की होती थी, जिसे बढ़ाकर अब 12 से 16 घंटे कर दिया गया है, लेकिन अधिकतर प्रोड्यूसर्स ‘ओवरटाइम’ का भुगतान नहीं करते।

  2. सुविधाओं की कमी: पैसे बचाने के चक्कर में सेट पर मिलने वाली बुनियादी सहूलियतें और खाने की गुणवत्ता गिरती जा रही है।

  3. कन्वेयंस बंद: पहले मिलने वाला 500 रुपये का कन्वेयंस भत्ता भी अब ज्यादातर प्रोड्यूसर्स ने बंद कर दिया है।

सरकार से उम्मीद: “हक की लड़ाई जारी रहेगी”

पूनम ढिल्लों का कहना है कि बड़े सितारों की चमक के बीच इंडस्ट्री की रीढ़ कहे जाने वाले कैरेक्टर आर्टिस्ट अपने बुनियादी अधिकारों के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों को लेकर वे कई बार केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों से मिल चुकी हैं। हालांकि अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही कलाकारों के हित में कड़े कानून और नियम बनाएगी।


निष्कर्ष: पूनम ढिल्लों का यह साहसपूर्ण कदम टीवी इंडस्ट्री में बदलाव की एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक हर कलाकार को उसका वाजिब हक और सम्मान नहीं मिलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।


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