लोकतंत्र दिवस पर ओम बिरला का संदेश
अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश: ‘लोकतंत्र भारत की प्राचीन सभ्यतागत विरासत’
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस (International Day of Democracy) के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भारत की सुदृढ़ लोकतांत्रिक जड़ों और महान परंपराओं को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए लोकतंत्र कोई नया विचार या आधुनिक पश्चिम की देन नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन सभ्यतागत लोकाचार (Civilisational Ethos) और जीवंत संस्कृति में गहरा समाया हुआ है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज का भारत केवल दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में ही नहीं जाना जाता, बल्कि प्राचीनकाल से चली आ रही समावेशी और लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं की अक्षुण्ण परंपरा का नेतृत्व भी करता है।
वैशाली के गणसंघ से लेकर ऋग्वेद की ‘सभा और समिति’ तक
ओम बिरला ने आधुनिक प्रतिनिधि लोकतंत्र के आकार लेने से बहुत पहले की भारतीय व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा:
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ऋग्वेद में सामूहिक विचार-विमर्श का उल्लेख: प्राचीन भारतीय ग्रंथों में सामूहिक संवाद, जन-परामर्श और सर्वसम्मति से निर्णय लेने के प्रमाण मिलते हैं। ऋग्वेद में ‘सभा’ और ‘समिति’ जैसी प्राचीन संस्थाओं का उल्लेख है, जो जन-सामान्य के विचारों और निर्णयों का प्रतिनिधित्व करती थीं।
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वैशाली का गणसंघ और स्वशासन: समय के साथ भारत के प्राचीन गणराज्यों और गण-संघों, विशेष रूप से वैशाली में, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और स्वशासन की परंपराएं विकसित हुईं।
लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, संवाद और नागरिक गरिमा का प्रतीक
लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि प्राचीन सभाओं से लेकर आज के विश्व के सबसे बड़े चुनावी लोकतंत्र तक भारत की यह यात्रा एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निरंतरता को दर्शाती है:
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लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ: हमारी सभ्यतागत विरासत हमें सिखाती है कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी संवाद, जन-भागीदारी, विविधताओं के प्रति सम्मान, सर्वसम्मति और हर नागरिक की गरिमा की रक्षा का नाम है।
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जीवंत और समावेशी भारत का संकल्प: अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर हमें अपने लोकतंत्र को अधिक सहभागी, समावेशी, जवाबदेह और जीवंत बनाने के संकल्प को दोहराना चाहिए तथा भारत की इस शाश्वत लोकतांत्रिक भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ भारत की इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लोकतांत्रिक चेतना का नमन करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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