नोएडा: इंजीनियर की मौत पर कैंडल मार्च

न्याय की गुहार: नोएडा सेक्टर-150 में निवासियों ने निकाला कैंडल मार्च, बिल्डर और प्रशासन की लापरवाही पर उठाए गंभीर सवाल

नोएडा: सेक्टर-150 में युवा इंजीनियर युवराज की गहरे गड्ढे में डूबने से हुई दर्दनाक मौत के बाद स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। रविवार को टाटा यूरेका पार्क और आसपास की सोसायटियों के सैकड़ों निवासियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर कैंडल मार्च निकाला और युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पिता की आंखों के सामने दो घंटे तड़पता रहा बेटा

घटना की सबसे हृदयविदारक बात यह रही कि युवराज के पिता अपने बेटे को डूबते हुए देखते रहे और मदद के लिए चिल्लाते रहे। निवासियों का आरोप है कि:

  • तमाशबीन बना प्रशासन: दमकल विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर मौजूद थीं, लेकिन दो घंटे तक किसी ने भी युवक को बचाने का सक्रिय प्रयास नहीं किया।

  • बचाने वाले को रोका: जब कुछ स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाकर पानी में उतरने की कोशिश की, तो अधिकारियों ने ‘खतरा’ बताकर उन्हें पीछे हटा दिया।

बिल्डर और प्राधिकरण की बड़ी लापरवाही

गुस्साए निवासियों ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर बिल्डर और नोएडा प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया है।

  1. खुला मौत का कुआं: बिल्डर ने बेसमेंट के लिए गहरा गड्ढा खोदकर उसे लावारिस छोड़ दिया था, जिसमें बारिश का पानी भरने से वह जानलेवा बन गया।

  2. सुरक्षा मानकों की अनदेखी: साइट पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे यह हादसा हुआ।

टूट चुके हैं माता-पिता, न्याय की उम्मीद

कैंडल मार्च के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। युवराज के माता-पिता अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद पूरी तरह टूट चुके हैं। प्रदर्शनकारी निवासियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और कसम खाई कि जब तक बिल्डर और लापरवाह अधिकारियों पर FIR और कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे शांत नहीं बैठेंगे।


निष्कर्ष: नोएडा की हाईटेक सोसायटियों के बीच इस तरह की लापरवाही प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा धब्बा है। युवराज की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम आदमी की जान की कीमत सिस्टम की फाइलों से कम है?

आपकी राय: क्या बिल्डर और मौके पर मौजूद लापरवाह अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए? कमेंट में अपनी आवाज उठाएं।


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