भर्तियों में देरी पर युवाओं का देशव्यापी आंदोलन
“34 करोड़ आवेदक, 91 लाख खाली पद और जवाब शून्य”: बेरोजगारी और लटकी भर्तियों के खिलाफ देशव्यापी छात्र आंदोलन की सुगबुगाहट
नई दिल्ली: “रातों की पढ़ाई, फॉर्मों का ढेर और अलमारी में धूल फांकती डिग्रियां…”— यह आज भारत के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों (Aspirants) की कड़वी हकीकत बन चुकी है। देश में सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले 34 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों और विभिन्न विभागों में 91 लाख से अधिक रिक्त पड़े पदों के बावजूद भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी, पेपर लीक और लटकी चयन प्रक्रियाओं ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
सोशल मीडिया से लेकर स्टडी रूम्स तक अब एक ही सवाल गूंज रहा है— आखिर कब तक? इसी आक्रोश के बीच पूरे देश में युवाओं द्वारा एक बड़े और एकजुट देशव्यापी आंदोलन (Pan-India Youth Movement) की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
आंकड़ों में युवाओं का दर्द: डिग्री हाथ में, लेकिन भविष्य अंधकार में
देश के विभिन्न राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश) में केंद्र व राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है:
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करोड़ों आवेदक और खाली पदों का अंबार: एक तरफ जहां 34 करोड़ से अधिक फॉर्म जमा हो चुके हैं, वहीं केंद्रीय व राज्य विभागों में 91 लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं।
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पेपर लीक और कोर्ट केस का चक्रव्यूह: SSC, रेलवे, राज्य लोक सेवा आयोग (State PSCs), पुलिस व शिक्षक भर्ती परीक्षा जैसे प्रमुख एग्जाम बार-बार पेपर लीक, अनियमितताओं और कानूनी मुकदमों के कारण वर्षों तक अटके रहते हैं।
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उम्र सीमा का संकट: भर्ती प्रक्रियाओं में 4 से 5 साल की देरी के कारण लाखों अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा (Age Limit) समाप्त हो रही है, जिससे उनका भविष्य दांव पर लग गया है।
“अध्ययन कक्ष से सड़कों तक”: ‘सिटी बाय सिटी’ बड़े प्रदर्शन की तैयारी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे संदेशों और छात्र संगठनों के आह्वान से स्पष्ट है कि युवा अब केवल डिजिटल विरोध तक सीमित रहने के मूड में नहीं हैं:
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सड़कों पर उतरेगी युवाओं की आवाज: छात्र अब अपने सवालों को पढ़ाई के कमरों से निकालकर सड़कों पर लाने की रणनीति बना रहे हैं। ‘सिटी बाय सिटी, स्टेट बाय स्टेट’ आधार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
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जवाबदेही तय करने की मांग: अभ्यर्थियों का मुख्य एजेंडा— पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर लागू करना, समयबद्ध तरीके से 91 लाख से अधिक रिक्त पदों को भरना और पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़ा राष्ट्रीय कानून बनाकर उसे सख्ती से लागू करना है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि देश का युवा ही राष्ट्र का भविष्य है। सरकार और नीति निर्माताओं को करोड़ों युवाओं की इस जायज चिंता और आक्रोश को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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