मेधा पुष्करणा की तीसरी किताब ने खोला नया मोर्चा
मेधा पुष्करणा की तीसरी किताब ने खोला नया मोर्चा
मेधा पुष्करणा की तीसरी किताब ने खोला नया मोर्चा
‘द ग्रेट ट्रायल’ में मेधा पुष्करणा का नया कानूनी रहस्य
मेधा पुष्करणा ने न्याय की दुनिया में रचा नया अध्याय
मुंबई /नई दिल्ली (अनिल बेदाग): सुप्रीम कोर्ट में वकालत, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से क्रिमिनोलॉजी में एमफिल और अब कानून के विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी। मेधा पुष्करणा अपने पेशेवर सफर में नए अध्याय जोड़ते हुए चर्चित कोर्टरूम सीरीज़ ‘द ग्रेट ट्रायल’ की तीसरी किताब ‘इट इज़ नॉट ओवर यट… एनिमल वर्ल्ड वर्सेज़ मैनकाइंड’ के साथ लौटी हैं।

लॉ एंड जस्टिस पब्लिशिंग कंपनी से प्रकाशित यह किताब रहस्य, पौराणिक कल्पना और कानूनी दांव-पेच का दिलचस्प मेल है। कहानी में पशु जगत और मानव जगत के बीच शांति के बाद उस समय हलचल मच जाती है, जब काउंसिल के बुद्धिमान सदस्य मिस्टर एलिफेंट पवित्र वन में मृत पाए जाते हैं। जांच की दिशा युवा वकील मेड्स के गुरु अंकल जस्ट की ओर मुड़ती है। इसके बाद शुरू होती है सच, सबूत और जवाबदेही की रोमांचक पड़ताल।

2023 में ‘वॉर ऑन अर्थ’ से शुरू हुई इस सीरीज़ ने कानून को नैतिकता और मानवता के सवालों से जोड़ने की अलग पहचान बनाई है। तीसरी किताब में कानूनी सिद्धांतों और लीगल मैक्सिम्स से जुड़ी 170 से अधिक प्रविष्टियां भी शामिल हैं। मेधा की उपलब्धियां लेखन तक सीमित नहीं हैं। वह संवैधानिक मामलों और आपराधिक अपीलों से जुड़े काम के साथ गलगोटिया यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में विजिटिंग फैकल्टी की भूमिका भी निभा रही हैं। यहां वह विद्यार्थियों को कोर्टरूम और चैंबर प्रैक्टिस की बारीकियां सिखाती हैं।
वकालत, शिक्षण और लेखन के बीच संतुलन बनाती मेधा अपनी किताब के जरिए पाठकों के सामने न्याय की नई पहेली रखती हैं। अमेज़न, किंडल और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध यह किताब सवाल छोड़ती है—क्या न्याय की यह कहानी सचमुच खत्म हो गई है?
