मयूर विहार: 4 की जगह बनी 7 मंज़िल बिल्डिंग

मयूर विहार में नियम-कायदे दरकिनार: 4 की जगह तान दी 7 मंज़िल बिल्डिंग, अवैध निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के पॉश और व्यस्त इलाके मयूर विहार से दिल्ली नगर निगम (MCD) के बिल्डिंग बाय-लॉज़ और नक्शा स्वीकृति नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इलाके में निर्धारित 4 मंज़िल की स्वीकृत क्षमता और तय ऊंचाई मानकों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए भू-माफियाओं और बिल्डरों ने धड़ल्ले से 7 मंज़िल की बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी है।

सघन आबादी वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी (Fire Safety) और भूकंपीय सुरक्षा (Seismic Safety) को ताक पर रखकर किए गए इस अवैध निर्माण से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और हादसे का डर व्याप्त है।

नियमों की सरेआम धज्जियां: जानिए पूरा मामला

दिल्ली नगर निगम के मास्टर प्लान और भवन निर्माण नियमों के अनुसार रिहायशी इलाकों में ग्राउंड फ्लोर/स्टिल्ट पार्किंग के साथ अधिकतम चार मंजिलों के निर्माण की ही अनुमति दी जाती है:

  • मानकों से 3 मंज़िल अधिक निर्माण: मयूर विहार के इस परिसर में स्वीकृत नक्शे के विपरीत 3 अतिरिक्त मंजिलें अवैध रूप से तान दी गईं।

  • सकरी गलियां और सुरक्षा का संकट: 7 मंजिल ऊंची इमारत बनने से न केवल आसपास के घरों में धूप-हवा रुक गई है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति (जैसे आग या भूकंप) के समय दमकल गाड़ियों का पहुँचना असंभव हो जाएगा।

  • भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इतना बड़ा अवैध निर्माण रातों-रात नहीं हुआ। क्षेत्रीय बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों की शह और अनदेखी के चलते बिल्डर बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ का सीधा सवाल: कब चलेगा एमसीडी का बुलडोजर?

दिल्ली में पहले भी अवैध और असंतुलित बहुमंजिला इमारतों के गिरने से कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद मयूर विहार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में 7 मंज़िल इमारत का बन जाना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है:

  1. सीलिंग और डिमोलिशन की मांग: क्षेत्रीय निवासियों ने एमसीडी कमिश्नर और सतर्कता विभाग (Vigilance) से शिकायत कर अवैध मंजिलों को तत्काल ध्वस्त (Demolish) करने और पूरी इमारत को सील करने की मांग की है।

  2. दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी: केवल बिल्डर पर एफआईआर (FIR) काफी नहीं है, बल्कि निर्माण के दौरान आंखें मूंदकर बैठने वाले संबंधित क्षेत्र के जेई (JE) और एई (AE) पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए दिल्ली नगर निगम से त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा करता है, ताकि राजधानी में अवैध निर्माण और बिल्डर माफिया पर नकेल कसी जा सके।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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