ब्रिक्स में भारत का जलवा: 10 बड़े फैसले
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत का ऐतिहासिक नेतृत्व: ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बुलंद, लिए गए 10 बड़े फैसले
विशेष रिपोर्.दीपक
नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) में भारत ने न केवल एक कुशल मेजबान की भूमिका निभाई, बल्कि वैश्विक आर्थिक नीतियों और रणनीतिक निर्णयों को एक नई दिशा देने का काम किया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बहुपक्षीय सम्मेलन ने व्यापार, वित्तीय स्वतंत्रता, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति हासिल की है।
इस सम्मेलन के माध्यम से भारत ने दुनिया के पटल पर ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) यानी विकासशील और उभरते देशों की प्राथमिकताओं, अधिकारों और आकांक्षाओं को मजबूती से रेखांकित किया।
BRICS Summit 2026: व्यापार और विकास को नई रफ्तार देने वाले 10 बड़े फैसले
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स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा: सदस्य देशों के बीच अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर ऐतिहासिक सहमति बनी।
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न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का विस्तार: विकासशील देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक के कोष को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
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ग्लोबल साउथ फोरम की स्थापना: विकासशील और अविकसित देशों की प्राथमिकताओं को संयुक्त राष्ट्र (UN) और जी20 (G20) जैसे वैश्विक मंचों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए भारत की पहल पर विशेष रोडमैप तैयार किया गया।
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एआई (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत के ‘यूपीआई’ और ‘डिजिटल इंडिया’ मॉडल की तर्ज पर ब्रिक्स देशों के बीच सुरक्षित और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने का ढांचा तय हुआ।
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आतंकवाद के खिलाफ सख्त साझा रुख: सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और साइबर अपराधों के खिलाफ बिना किसी दोहरे मापदंड के एकजुट होकर कठोर कार्रवाई करने पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।
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खाद्य सुरक्षा एवं कृषि सहयोग: जलवायु परिवर्तन के दौर में वैश्विक खाद्य संकट से निपटने के लिए ब्रिक्स ‘अन्न सुरक्षा नेटवर्क’ और कृषि प्रौद्योगिकी ट्रांसफर को गति देने का फैसला लिया गया।
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सप्लाई चेन (Supply Chain) का सुदृढ़ीकरण: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से बचने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को बाधा-रहित और मजबूत बनाने की रणनीति बनाई गई।
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जलवायु वित्त और नवीकरणीय ऊर्जा: विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्तपोषण (Climate Finance) की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की मांग के साथ-साथ सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में साझा अनुसंधान पर जोर दिया गया।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) साझेदारी: ब्रिक्स देशों के छोटे और मध्यम उद्यमियों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच और तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए विशेष एमएसME नेटवर्क की शुरुआत की गई।
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स्वास्थ्य और महामारी रोकथाम प्रणाली: भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए वैक्सीन अनुसंधान, निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने हेतु संयुक्त अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभुत्व
इस शिखर सम्मेलन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत केवल एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर संतुलन और शांति स्थापित करने वाला एक प्रमुख रणनीतिक स्तंभ है। भारत के प्रभावी नेतृत्व ने ब्रिक्स को केवल एक आर्थिक समूह से आगे बढ़ाकर वैश्विक सुधारों के एक शक्तिशाली इंजन में बदल दिया है।
