23 और 24 अक्‍तूबर 2026 को लखनऊ करेगा प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण पर तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला की मेजबानी

उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे; उत्तरी क्षेत्र के आठ राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश इसमें भाग लेंगे

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा 23 और 24 अक्‍तूबर 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में साधना श्रृंखला 2026 की तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस दो दिवसीय परामर्श में उत्तरी क्षेत्र के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एक साथ आएँगे और इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक, दक्षता-आधारित क्षमता विकास संस्थानों के रूप में कैसे विकसित किया जा सकता है।

इस कार्यशाला का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस अवसर पर माननीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ एक क्षेत्रीय श्रृंखला

साधना श्रृंखला, जिसका पूरा नाम स्ट्रेंदनिंग अडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टीट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट है, चार क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं की एक श्रृंखला है। यह संस्थागत सुधार पर उस संवाद को आगे बढ़ाती है, जिसका नेतृत्व आयोग ने पिछले एक वर्ष के दौरान क्षेत्रीय कार्यबल की बैठकों, 2 से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित साधना सप्ताह और क्षमता विकास को संस्थागत रूप देने पर मई 2026 में आयोजित राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के माध्यम से किया है।

इस श्रृंखला का शुभारंभ 29 और 30 सितंबर 2026 को विजयवाड़ा में हुआ, जिसके बाद 9 अक्‍तूबर 2026 को गुवाहाटी में पूर्वोत्तर क्षेत्र की कार्यशाला आयोजित की गई। अब लखनऊ इस संवाद को उत्तरी क्षेत्र तक ले आया है।

भाग लेने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड राज्य तथा चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भाग लेंगे। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुख और संकाय सदस्य, विषय विशेषज्ञ तथा उद्योग जगत के भागीदार भी इसमें शामिल होंगे।

हिमालयी क्षेत्र, सिंधु-गंगा के मैदानों और मरुस्थलीय राज्य राजस्थान में फैले आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी के साथ, लखनऊ में आयोजित यह कार्यशाला इस श्रृंखला में प्रशासनिक संदर्भों की अब तक की सबसे व्यापक विविधता को एक साथ लाती है।

कार्यशाला किन विषयों को संबोधित करेगी

आज सिविल सेवकों से अपेक्षा की जाती है कि वे नई प्रौद्योगिकियों, नागरिकों की बदलती अपेक्षाओं और विकास संबंधी जटिल प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार रखें। उन्हें इसके लिए तैयार करने में प्रशिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि प्रशिक्षण संस्थान अधिकारियों की वास्तविक कार्यगत आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी भूमिका कैसे निभा सकते हैं।

विचार-विमर्श में चार व्यापक क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा: संस्थागत शासन और नेतृत्व; संस्थानों की परिचालन प्रभावशीलता और उनके बीच सहयोग; संकाय सदस्यों की दक्षताएँ और संस्थागत दक्षताएँ; तथा प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग सहित डिजिटल रूपांतरण। प्रत्येक भाग लेने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपनी प्राथमिकताओं की पहचान करने और सुधार के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करने में सहायता दी जाएगी।

साझा मंच के रूप में उन्नति

इन सुधारों को यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इनिशिएटिव्‍स (उन्नति) पोर्टल के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा, जिसे साधना सप्ताह 2026 के दौरान शुरू किया गया था। उन्नति एक ही मंच पर 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है और उन्हें क्षमता विकास योजनाओं में चिह्नित दक्षता संबंधी आवश्यकताओं से जोड़ता है। इससे संस्थानों को संसाधन साझा करने, सहयोग करने और आँकड़ों के आधार पर अपने कार्य में सुधार करने में मदद मिलती है।

प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण की रूपरेखा तैयार करना

लखनऊ कार्यशाला के निष्कर्षों के साथ-साथ विजयवाड़ा, गुवाहाटी और अंतिम क्षेत्रीय कार्यशाला के निष्कर्षों को आयोग द्वारा विकसित की जा रही प्रशिक्षण संस्थान रूपांतरण रूपरेखा में शामिल किया जाएगा। यह रूपरेखा सुधारों के लिए एक साझा दिशा प्रदान करेगी, साथ ही प्रत्येक राज्य की संस्थागत वास्तविकताओं के अनुरूप आवश्यक लचीलापन भी बनाए रखेगी।

साधना श्रृंखला के माध्यम से आयोग का उद्देश्य प्रशिक्षण संस्थानों का एक परस्पर जुड़ा हुआ और उत्तरदायी नेटवर्क विकसित करना है, जो सिविल सेवकों को नागरिकों की बेहतर सेवा करने में सक्षम बनाए। यह मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप है।

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