विधायिका सम्मेलन: गुणवत्ता पर जोर

विधायिकाओं में गुणवत्ता और तकनीक पर जोर

लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के दूसरे दिन विधायी कार्यों में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर व्यापक मंथन हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए गुणवत्ता के मानक स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।


सम्मेलन के तीन प्रमुख विचार-बिंदु

दूसरे दिन के सत्र में लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन मुख्य विषयों पर चर्चा की गई:

  1. प्रौद्योगिकी का उपयोग: विधायी प्रक्रियाओं को पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल टूल्स को अपनाना।

  2. क्षमता वृद्धि: विधायकों के कौशल और दक्षता में सुधार करना ताकि वे शासन में बेहतर योगदान दे सकें।

  3. जनता के प्रति जवाबदेही: लोकतंत्र में विधायिका की जनता के प्रति जिम्मेदारी को और सुदृढ़ करना।


यूपी विधानसभा के नवाचारों की सराहना

लोकसभा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की:

  • सर्वोत्तम प्रथाओं का समावेश: देशभर की विधानसभाओं की अच्छी प्रक्रियाओं को यूपी विधानसभा ने सफलतापूर्वक लागू किया है।

  • प्रोफेशनल अनुभव का उपयोग: विधायकों की शैक्षणिक योग्यता और उनके पेशेवर अनुभव का विधायी कार्यों में रचनात्मक उपयोग करने की पहल को सराहा गया।


एआई और भविष्य की विधायी प्रक्रिया

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विधायी कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर जोर दिया:

  • संस्थागत ज्ञान का समन्वय: संसद और राज्य विधायिकाओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एआई एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

  • प्रक्रियाओं का मानकीकरण: विधायी निकायों की प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने के लिए गठित समिति जल्द ही मानकीकरण पर अपनी रिपोर्ट देगी।


आज मुख्यमंत्री योगी करेंगे संबोधित

21 जनवरी को सम्मेलन का समापन होगा। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष समापन भाषण देंगे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। समापन समारोह में देशभर से आए पीठासीन अधिकारी हिस्सा लेंगे।


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