KVIC रिश्वतखोरी: 4 साल की सज़ा!
⚖️ सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद का फैसला
📂 मामले का विवरण
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FIR दर्ज: 15.09.2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा।
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आरोप: अवैध परितोषण (Illegal Gratification) की मांग करना और स्वीकार करना।
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अपराध की अवधि: 21.11.2016 से 15.09.2017 तक।
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विनोद कुमार की भूमिका:
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वह KVIC, मंडल कार्यालय मेरठ में सहायक के रूप में कार्यरत थे।
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वह मेरठ और शामली के लिए जिला समन्वयक (District Coordinator) के रूप में भी कार्य कर रहे थे।
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उन्होंने एक सीमेंट टाइल्स विनिर्माण यूनिट स्थापित करने के लिए ₹15,57,600 के ऋण से संबंधित शिकायतकर्ता के अवैध आवेदन को संसाधित करने के लिए ₹1,25,000 की अवैध रिश्वत प्राप्त करने के लिए निजी व्यक्ति सुरेंद्र खुराना के साथ आपराधिक षडयंत्र (Criminal Conspiracy) किया।
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जांच और मुकदमा:
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आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल: सीबीआई ने 13.11.2017 को किया।
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आरोप तय (Charges Framed): कोर्ट ने 15.01.2018 को किए।
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माननीय न्यायालय ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें उपरोक्त सजा सुनाई।
