ब्रिक्स फोरम में जयशंकर: भरोसेमंद व्यापार का संदेश
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ में गरजे विदेश मंत्री एस. जयशंकर: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत बना भरोसेमंद व्यापार का वैश्विक स्तंभ
नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर (2026) को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बीच भारत ने दुनिया को आर्थिक स्थिरता और निष्पक्ष व्यापार का बड़ा संदेश दिया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ (BRICS Business Forum) को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत की मजबूत भूमिका और ‘भरोसेमंद व्यापार’ (Trusted Trade) की अनिवार्यता पर खुलकर बात रखी।
‘दुनिया बदलाव के दौर में, अस्थिरता सबसे बड़ी चुनौती’: डॉ. जयशंकर
वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में दुनिया एक अभूतपूर्व बदलाव (Churn) से गुजर रही है:
-
ट्रिपल क्राइसिस की मार: डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज वैश्विक बाजार भू-राजनीतिक संघर्षों (Geo-political Conflicts), महामारियों के झटकों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं के गंभीर आर्थिक दुष्परिणामों को झेल रहा है।
-
अनिश्चितता का माहौल: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के टूटने और आर्थिक अस्थिरता के बीच वैश्विक स्तर पर व्यापारिक भरोसा बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।
चुनौतियों के बीच अवसरों का उदय: भारत की तकनीक और डिजिटलीकरण की ताकत
विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत ने इस संकट को अवसर में बदलकर दुनिया के सामने एक आदर्श पेश किया है:
-
डिजिटलीकरण से तरक्की: एक तरफ जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में है, वहीं दूसरी ओर भारत ने तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण (Digitization) और तकनीकी विकास के दम पर उत्पादकता और विकास के नए द्वार खोले हैं।
-
भरोसेमंद पार्टनर के रूप में भारत: दुनिया के देश अब आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण (Diversification) के लिए भारत को एक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर टिकीं दुनिया की निगाहें
12 और 13 सितंबर को दिल्ली के अत्याधुनिक ‘भारत मंडपम’ में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद होने जा रही है:
-
आर्थिक सहयोग पर जोर: ब्रिक्स बिजनेस फोरम के जरिए वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गजों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारत और ब्रिक्स देश आने वाले समय में विश्व आर्थिक वृद्धि के मुख्य इंजन साबित होंगे।
विदेश मंत्री का यह संबोधन साफ संकेत देता है कि भारत केवल वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि डिजिटल क्रांति और भरोसेमंद नीतियों के दम पर नए वैश्विक व्यापारिक ढांचे की अगुवाई भी कर रहा है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
मिजोरम यूथ कांग्रेस की बैठक: 25 हजार खाली पदों पर संग्राम!
