IDFC बैंक फ्रॉड: ED की बड़ी कार्रवाई
IDFC बैंक फ्रॉड और ₹645 करोड़ के घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल; ₹200.84 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
विशेष राष्ट्रीय एवं आर्थिक अपराध ब्यूरो: चंडीगढ़ / नई दिल्ली
प्रवर्तन निदेशालय (ED), चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने आईडीएफसी बैंक फ्रॉड और सरकारी फंड्स की हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। ईडी ने रिभव ऋषि, विक्रम वाधवा, अभय कुमार और नरेश कुमार सहित 14 आरोपियों व शेल संस्थाओं (Shell Entities) के खिलाफ विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint/चार्जशीट) दाखिल कर दी है।
इसी क्रम में ईडी ने धारा 5(1) PMLA के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों और उनके सहयोगियों की कुल ₹200.84 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से जब्त (Provisional Attachment) कर लिया है।
विभिन्न सरकारी विभागों और स्कूलों के ₹645 करोड़ डाइवर्ट
यह पूरा मामला हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), चंडीगढ़ पुलिस EOW और सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई कई प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर शुरू हुआ था:
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सरकारी विभागों का पैसा निशाना: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank) में मौजूद हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा पावर जनरेशन, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड, पंचकुला नगर निगम और निजी स्कूलों (DC Montessori व DC Model) के खातों से सरकारी फंड्स की अवैध रूप से हेराफेरी की गई।
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जालसाजी का तरीका: बैंक अधिकारियों, सर्राफा कारोबारियों (Jewellers), रियल एस्टेट बिल्डरों और कुछ भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी एफडीआर (Forged FDRs), फर्जी आरटीजीएस/एनईएफटी लेटर और जाली बैंक स्टेटमेंट तैयार कर ₹645 करोड़ रुपये की राशि शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका
ईडी की जांच में इस विशाल नेटवर्क और सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है:
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रिभव ऋषि (मुख्य साजिशकर्ता): पूरे षड्यंत्र का मुख्य मास्टरमाइंड था, जो कैप्को फिनटेक, स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स और आरएस ट्रेडर्स जैसी शेल कंपनियों को नियंत्रित कर फंड्स की लेयरिंग कर रहा था।
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अभय कुमार (आईडीएफसी बैंक का तत्कालीन रिलेशनशिप मैनेजर): इसने फर्जी कागजात प्रोसेस करने और अनाधिकृत बैंक लेनदेन को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई।
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विक्रम वाधवा (चंडीगढ़ का रियल एस्टेट डेवलपर): इस घोटाले के पैसों का सबसे बड़ा लाभार्थी (Beneficiary) रहा, जिसने करोड़ों रुपये प्रीमियम आवासीय और वाणिज्यिक जमीनों में निवेश किए। ईडी ने अकेले विक्रम वाधवा और उससे जुड़ी संस्थाओं की ₹151.33 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की हैं।
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नरेश कुमार उर्फ नरेश भुवानी (सुपरिटेंडेंट, विकास एवं पंचायत विभाग): सरकारी फंड्स को शेल कंपनियों में डाइवर्ट करने में शामिल था और अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए बिचौलिए (Middle-man) के रूप में काम कर रहा था।
आवासीय, वाणिज्यिक संपत्तियां और बैंक बैलेंस जब्त
कुर्क की गई ₹200.84 करोड़ की संपत्तियों में मुख्य रूप से आवासीय मकान, व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियां, कृषि भूमि, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में शेयर, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) शामिल हैं।
ईडी ने बताया कि इस सिंडिकेट में शामिल अन्य लोक सेवकों (Public Servants) की भूमिका और रिश्वत के लेन-देन के कड़ियों की आगे की जांच जारी है।
आर्थिक एवं राष्ट्रीय ब्यूरो: चंडीगढ़ / नई दिल्ली
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
रिपोर्ट: विशेष जांच एवं क्राइम ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, , दिल्ली


