है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू

‘है जवानी तो इश्क होना है’ मूवी रिव्यू: डेविड धवन की 46वीं फिल्म के ‘इश्क’ में पड़ना इस बार हुआ मुश्किल

रिपोर्ट: सोशल मीडिया डेस्क

फिल्म: है जवानी तो इश्क होना है

निर्देशक: डेविड धवन

मुख्य कलाकार: वरुण धवन, मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े

हिंदी सिनेमा में पिछले तीन दशकों से भी ज्यादा समय से सक्रिय और ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘जुड़वा’, ‘कुली नंबर 1’ व ‘बीवी नंबर 1’ जैसी ब्लॉकबस्टर कॉमेडी फिल्में देने वाले दिग्गज फिल्ममेकर डेविड धवन एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटे हैं [cite: पिछले तीन दशक से ज्‍यादा समय से फिल्‍मों में सक्रिय फिल्‍ममेकर डेविड धवन ने हिंदी सिनेमा को आंखें, शोला और शबनम, जुड़वा, कुली नंबर 1, बीवी नंबर 1 जैसी कई हिट कॉमेडी फिल्‍में दी हैं।]। वरुण धवन स्टारर ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनके निर्देशन में बनी 46वीं फिल्म है, जो सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है [cite: वरुण धवन की ‘है जवानी तो इश्क होना है’ पेद्दी के एक दिन बाद सिनेमाघरों में आ गई है।, ‘है जवानी तो इश्‍क होना है’ उनके द्वारा निर्देशित 46वीं फिल्‍म है।]। हालांकि, इस बार बॉक्स ऑफिस पर डेविड धवन की पुरानी और चिर-परिचित कॉमेडी का जादू दर्शकों पर असर करता हुआ नहीं दिख रहा है।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी जस (वरुण धवन) और उसकी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी शादी को 5 साल हो चुके हैं और अब दोनों तलाक लेने की कगार पर हैं [cite: कहानी यूं है कि जस (वरुण धवन) और उसकी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) तलाक लेने की कगार पर हैं। दरअसल शादी के पांच साल हो चुके हैं।]। जस पिता बनने की इच्छा रखता है, लेकिन बानी अभी अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है और जस को जीवन में आगे बढ़ने की सलाह देती है।

इसके बाद जस लंदन चला जाता है, जहाँ उसकी जिंदगी में प्रीत (पूजा हेगड़े) की एंट्री होती है। कहानी में असली और सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आता है, जब जस और बानी का रिश्ता एक आखिरी अंतरंग पल के मोड़ पर खड़ा होता है और आगे चलकर बानी व प्रीत दोनों लगभग एक ही समय पर जस को अपनी-अपनी गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) की खबर दे देती हैं [cite: इस बीच जस और बानी के रिश्ते का आखिरी अंतरंग पल को वह लगभग भूल चुका है, वहीं बानी की सोच भी बदल चुकी होती है। कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब बानी और प्रीत दोनों लगभग एक ही समय पर जस को अपनी गर्भावस्था की खबर देने पहुंच जाती हैं।।]। इसके बाद प्रेमिका और पत्नी के बीच फंसे जस की जो फजीहत होती है, वही फिल्म का मुख्य आधार है।

कहाँ चूक गई फिल्म?

कोरोना काल (महामारी) के बाद के दौर में दर्शकों का सिनेमा को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है. आज का दर्शक विश्व सिनेमा, रिश्तों की परिपक्व समझ और कुछ अलग तरह की सिचुएशनल कॉमेडी की उम्मीद करता है:

  • पुराना फॉर्मूला हुआ बेअसर: फिल्म में जिन गलतफहमियों और वैवाहिक उलझनों को हास्य (कॉमेडी) के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है, वे आज के दौर में मनोरंजन करने के बजाय काफी अविश्वसनीय, अतार्किक और उलझाऊ लगती हैं [cite: ऐसे में डेविड धवन निर्देशित ‘है जवानी तो इश्‍क होना है’ जिन गलतफहमियों और संबंधों की उलझनों को हास्य के रूप में पेश करती है, वे मनोरंजन से ज्यादा अविश्वसनीय और उलझाऊ लगती हैं।]।

  • चमक खो चुकी है वैसी कॉमेडी: 90 के दशक का जो पुराना फॉर्मूला कभी थिएटर्स में दर्शकों को गुदगुदाने और हंसने पर मजबूर करने में पूरी तरह सफल रहता था, वही घीसा-पिटा अंदाज इस नई फिल्म में अपनी पूरी चमक खो चुका महसूस होता है।

यदि आप वरुण धवन के पक्के वाले फैन हैं या बिना किसी तर्क के केवल पुराना लाउड कॉमेडी ड्रामा देखना पसंद करते हैं, तभी यह फिल्म आपके लिए है; अन्यथा डेविड धवन के इस ‘इश्क’ की उलझनों को झेल पाना इस बार थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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