शास्त्रों में चार नवरात्रि का जिक्र किया गया है। जिसमें से केवल दो नवरात्रि को धूमधाम से मनाया जाता है। माघ और आषाढ़ में आने वाले नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस साल आषाढ़ माह नवरात्रि 22 जून से शुरू हो रहा है। नवरात्रि 30 जून को समाप्त होना। इन नौ दिनों में मा दुर्गा की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। जिसकी वजह से ही इन नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। कोराना संकट के कारण इस बार घरों में ही मां की अराधना की जाएगी।

गुप्त नवरात्रि आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

गुप्त नवरात्रि के बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से ही इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व  बताया गया है.महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है।

चैत्र या वासंतिक नवरात्र और अश्विन या शारदीय नवरात्रों के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन इसके अतिरिक्त दो और भी नवरात्र हैं जिनमे विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है। कुल मिलाकर वर्ष में चार नवरात्र होते हैं. यह चारों ही नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय मनाए जाते हैं. महाकाल संहिता और तमाम शाक्त ग्रंथों में इन चारों नवरात्रों का महत्व बताया गया है। इसमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। सामान्य नवरात्रि में आम तौर पर सात्विक और तांत्रिक पूजा दोनों की जाती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में ज्यादातर तांत्रिक पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में ज्यादा प्रचार प्रसार नहीं किया जाता है, बल्कि अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है। नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है सप्तशती का पाठ करना चाहिए।