बैगा समाज में मौतें: स्वास्थ्य सेवाओं पर रार

मध्य प्रदेश में बैगा आदिवासियों की मौत पर सियासत तेज: ‘आलीशान कार्यालय बनाम बदहाल अस्पताल’ के मुद्दे पर घमासान

भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और कथित रूप से बीमारियों के कारण हुई मौतों को लेकर देश में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। मध्य प्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज के लगभग 30 परिवारों में हुई मौतों की दुखद खबरों के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा और मध्य प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं।

‘पार्टी कार्यालयों की भव्यता और अस्पतालों की बदहाली’: तीखा हमला विपक्षी नेताओं और आलोचकों ने सोशल मीडिया एवं मीडिया बयानों के जरिए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं:

  • प्राथमिकताओं पर सवाल: विपक्षी प्रवक्ताओं का आरोप है कि सत्ता पक्ष अपने राजनीतिक और सांगठनिक ढांचों के विस्तार एवं प्रचार-प्रसार पर भारी संसाधन खर्च कर रहा है, जबकि सुदूर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक मयसर नहीं हो पा रही हैं।

  • बैगा समाज में मातम: आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यदि समय पर डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाएं और बेहतर अस्पताल होते, तो 30 मासूमों और ग्रामीणों की जान बचाई जा सकती थी।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया मामले के तूल पकड़ने पर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सफाई जारी करते हुए जांच के आदेश दिए हैं:

  • मेडिकल टीमों की तैनाती: स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रभावित आदिवासी इलाकों में विशेष मेडिकल टीमों को भेजा गया है ताकि बीमारियों के कारणों (जैसे दूषित पानी, मौसमी बीमारियां या कुपोषण) का त्वरित इलाज और रोकथाम की जा सके।

  • ढांचागत सुधार का दावा: सरकार का पक्ष है कि ‘आयुष्मान भारत’ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सुदूर जनजातीय अंचलों में स्वास्थ्य उप-केंद्रों और वेलनेस सेंटरों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है और मौतों के कारणों की विस्तृत जांच कराई जा रही है।

आदिवासी बहुल अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और मौतों का यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस का मुख्य केंद्र बन गया है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine

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