गोरखपुर रत्न: CM योगी देंगे सम्मान
गोरखपुर महोत्सव का भव्य समापन: CM योगी देंगे ‘गोरखपुर रत्न’, विरासत और विकास को मिलेगी नई उड़ान
गोरखपुर: कला, संस्कृति और प्रतिभा का संगम ‘गोरखपुर महोत्सव’ अपने चरम पर है। मंगलवार (13 जनवरी) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान वे न केवल विकास और विरासत के संकल्प को दोहराएंगे, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में जिले का नाम रोशन करने वाली 6 विभूतियों को ‘गोरखपुर रत्न’ सम्मान से भी नवाजेंगे।
साल 2017 के बाद से गोरखपुर ने जिस तरह पिछड़ेपन की छवि को तोड़कर प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुआ है, यह महोत्सव उसी बदलाव का एक जीवंत प्रतीक बन गया है।
इन 6 प्रतिभाओं को मिलेगा ‘गोरखपुर रत्न’ सम्मान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने हाथों से इन विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित करेंगे:
| नाम | क्षेत्र | उपलब्धि |
| शिवम यादव | खेल (पैरा बैडमिंटन) | थाइलैंड पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 के पदक विजेता। |
| अनन्या यादव | खेल (हैंडबाल) | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईएचएफ ट्रॉफी में रजत पदक विजेता। |
| नीतिश सिंह | खेल (पर्वतारोहण) | किलिमंजारो और माउंट एलब्रुस जैसी चोटियों पर फहराया तिरंगा। |
| प्रो. शरद मिश्रा | विज्ञान | आर्सेनिक प्रदूषण और कैंसर शोध में सराहनीय कार्य। |
| अविनाश कुमार मौर्य | कृषि | टमाटर की उन्नत खेती से लाखों का मुनाफा कमाने वाले प्रगतिशील किसान। |
| आशीष श्रीवास्तव | सामाजिक कार्य | समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय योगदान। |
विकास और संस्कृति का संगम है गोरखपुर महोत्सव
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह द्वारा शुरू किए गए इस तीन दिवसीय महोत्सव ने स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों को एक बड़ा मंच प्रदान किया है। रामगढ़ताल के किनारे चंपा देवी पार्क में सजे इस मेले में जहाँ एक ओर पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं दिख रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोक कलाओं का संरक्षण भी हो रहा है।
महोत्सव की मुख्य विशेषताएं:
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मेधा का सम्मान: जिले की प्रतिभाओं को वैश्विक पहचान दिलाना।
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सांस्कृतिक विरासत: यूपी की पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन।
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आर्थिक मजबूती: स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा।
मुख्यमंत्री का विजन: बदलता गोरखपुर
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा भी मिलती है।

