सोना ₹3400 टूटकर ₹1.47 लाख पर अटका
भारतीय सर्राफा और वायदा बाजार (MCX) में सोने की कीमतों में एक बड़ा गोता देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली (Profit-booking) के चलते सोने के भाव करीब ₹3,200 से ₹3,400 प्रति 10 ग्राम तक टूटकर ₹1.47 लाख से ₹1.50 लाख के दायरे में आ गए हैं।
1. सोने की कीमत घटने के 4 मुख्य कारण
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मुनाफावसूली (Profit Booking): हाल के हफ्तों में सोने द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड स्तरों के बाद संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स ने घरेलू वायदा बाजार (MCX) और कॉमेक्स (COMEX) दोनों पर जमकर मुनाफा वसूला है।
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मजबूत अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड: डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण गैर-ब्याज देने वाले सोने की मांग पर दबाव बना है।
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यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख (Hawkish tone) और अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Fed) की ब्याज दर नीतियों के दबाव के कारण बुलियन मार्केट में बिकवाली हावी हुई।
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कच्चे तेल की कीमतें और मुद्रास्फीति: कच्चे तेल के दामों में उछाल से बनी मुद्रास्फीति (Inflation) की चिंताओं ने बाजार को यह सोचने पर मजबूर किया है कि केंद्रीय बैंक दर कटौती में जल्दबाजी नहीं करेंगे।
2. सोने में कब तक आ सकती है तेजी?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने में यह गिरावट अस्थायी (Short-term correction) है।
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शॉर्ट-टर्म (अल्पकालिक): फिलहाल सोने में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रह सकता है और कीमतें ₹1,46,000 से ₹1,52,500 प्रति 10 ग्राम के दायरे में कंसोलिडेट कर सकती हैं।
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लॉन्ग-टर्म (दीर्घकालिक): केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अमेरिकी राजकोषीय जोखिमों के चलते सोने का दीर्घकालिक ट्रेंड (Long-term Bullish Trend) अभी भी मजबूत बना हुआ है।
3. किन संकेतों और लेवल पर नजर रखें?
निवेशकों और खरीदारों को आगे की रणनीति तय करने के लिए इन प्रमुख फैक्टरों और टेक्निकल लेवल्स पर नजर रखनी चाहिए:
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महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स:
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सपोर्ट लेवल (न्यूनतम सीमा): MCX पर ₹1,48,000 और इसके टूटने पर ₹1,46,000 पहला बड़ा सपोर्ट जोन है।
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रेजिस्टेंस लेवल (ऊपरी सीमा): तेजी की वापसी के लिए सोने को ₹1,52,500 और उसके बाद ₹1,55,000 के स्तर को पार करना होगा।
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यूएस फेड की मौद्रिक नीति: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों और आने वाले अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों (CPI मुद्रास्फीति और रोजगार आंकड़े) पर बाजार की नजर रहेगी।
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भू-राजनीतिक घटनाक्रम: मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में कोई बड़ा मोड़ या तनाव कम होने/बढ़ने का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ‘बाय ऑन डिप्स’ (Buy on Dips) यानी निचले स्तरों पर टुकड़ों में खरीदारी करने का अवसर हो सकती है। किसी भी बड़े वित्तीय फैसले से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
