करोड़ों की ठगी: सैकड़ों परिवार बर्बाद!
Bareilly Big Fraud: महाठग कन्हैया गुलाटी ने लूटी बरेली की ‘खून-पसीने’ की कमाई, करोड़ों की ठगी कर फरार; पीड़ितों ने दी सुसाइड की चेतावनी
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा महाघोटाला सामने आया है जिसने सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला खड़ा किया है। ‘कैनविज ग्रुप’ के सर्वेसर्वा कन्हैया गुलाटी ने निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की और अब वह अपने सहयोगियों के साथ फरार है। अपनी बेटियों की शादी और बच्चों के भविष्य के लिए जमा पूंजी डूबने से हताश पीड़ित अब सामूहिक आत्महत्या की चेतावनी दे रहे हैं।
इनवेस्टमेंट के नाम पर ‘लूट’ की 4 दर्दनाक कहानियां
1. सिक्योरिटी गार्ड की बेटियों के सपने टूटे
चनहेटा निवासी धर्मदास गुप्ता सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर अपनी दो बेटियों की शादी के लिए पैसा जोड़ रहे थे। एजेंट सलीम और कन्हैया गुलाटी ने उन्हें पैसा 2 साल में दोगुना करने का लालच दिया।
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नुकसान: 6.86 लाख रुपये (जमा पूंजी और प्लॉट बेचकर निवेश)।
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धोखा: कंपनी के चेक बाउंस हो गए और अब आरोपी फोन तक नहीं उठा रहे।
2. विधवा महिला की 10 साल की मेहनत बेकार
उज्जवल महानगर की अंजू गुप्ता ने 2015 में बेटी की शादी के लिए 16 लाख रुपये का प्लॉट खरीदा था। 4 साल पहले पति के निधन के बाद वह इस उम्मीद में थीं कि यह निवेश काम आएगा।
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धोखा: फरीदपुर की कालोनी का आज तक विकास नहीं हुआ और न ही BDA से नक्शा पास हुआ। अंजू ने जैसे-तैसे कर्ज लेकर बेटी की शादी की।
3. बच्चों के भविष्य के लिए 1.5 करोड़ का निवेश, पिता को आया हार्ट अटैक
शाहजहांपुर के प्रिंस गुप्ता ने बच्चों के भविष्य के लिए बिल्स वैली कालोनी में 1.5 करोड़ रुपये निवेश किए। उन्होंने बैंक से भारी लोन लिया था।
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असर: धोखाधड़ी के सदमे से प्रिंस के पिता को हार्ट अटैक आ गया। बैंक का कर्ज चुकाते-चुकाते परिवार मानसिक तनाव की चरम सीमा पर है।
4. बीटेक कर रही बेटी की फीस भी डूबी
बदायूं के शिवकुमार गुप्ता ने अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई के लिए पाई-पाई जोड़ी थी। 10 लाख रुपये निवेश करने पर उन्हें हर महीने 46 हजार रुपये का लालच दिया गया। अब उनकी बड़ी बेटी की बीटेक की पढ़ाई और छोटी बेटियों का भविष्य अधर में है।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
कन्हैया गुलाटी और उसके एजेंटों (सलीम, रियासत हुसैन आदि) ने ठगी के लिए खास ‘मोडस ऑपरेंडी’ अपनाई:
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दोगुना-तिगुना रिटर्न: निवेश को 2 साल में दोगुना और 5 साल में तीन गुना करने का झांसा।
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फर्जी प्रोजेक्ट्स: फरीदपुर और आसपास के इलाकों में अवैध कॉलोनियां काटकर ‘बीडीए अप्रूव्ड’ बताकर प्लॉट बेचे।
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बाउंस चेक का खेल: जब पैसे वापसी का समय आया, तो एक बैंक से दूसरे बैंक के चेक देकर समय टाला गया और अंत में फरार हो गए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
इतने बड़े स्तर पर ठगी और सैकड़ों परिवारों की बर्बादी के बावजूद पुलिस अब तक मुख्य आरोपी कन्हैया गुलाटी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण ही ठग को भागने का मौका मिला।
चेतावनी: पीड़ितों का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और उनकी मेहनत की कमाई वापस नहीं दिलाई गई, तो उनके पास जान देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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