फॉर्म 6 विवाद: सॉफ्टवेयर अपडेट और ‘वोट चोरी’ पर इंडी गठबंधन का तीखा हमला
“फॉर्म 6 विवाद: इंडी गठबंधन का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला; ‘वोट चोरी’ की जिम्मेदारी और अधिकारियों की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल”
नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों के समूह इंडी (INDIA) गठबंधन की उच्चस्तरीय बैठक के बाद देश की मुख्यधारा की राजनीति और सोशल मीडिया पर मतदाता सूचियों में बदलाव तथा ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर जुबानी जंग और तीखी हो गई है। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर और फॉर्म 6 के अचानक बदले जाने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर धांधली का आरोप लगाया है।
विपक्ष ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और आयोग के शीर्ष प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा है कि जब क्षेत्रीय चुनाव आयुक्तों और अधिकारियों की आपत्तियां आधिकारिक रिकॉर्ड पर मौजूद थीं, तब सॉफ्टवेयर कोड में बदलाव का अंतिम फैसला किसने और किसके इशारे पर लिया?
“सॉफ्टवेयर ने खुद कोड नहीं बदला” — विपक्ष का कड़ा प्रहार
बैठक के बाद जारी बयानों और सोशल मीडिया पर जारी आक्रामक राजनीतिक हमलों में इंडी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बिंदुवार सवाल खड़े किए हैं:
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सॉफ्टवेयर और कोडिंग की जवाबदेही: विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसी भी डिजिटल सिस्टम या चुनाव आयोग के पोर्टल में कोई बदलाव अपने आप नहीं होता। किसी न किसी ने नए फीचर्स की रिक्वायरमेंट (Requirement) भेजी, किसी डेवलपर ने कोड (Code) बदला, किसी अधिकारी ने उसे अप्रूव (Approve) किया और अंततः उसे सर्वर पर लाइव (Live) किया गया।
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कमिश्नरों की आपत्ति का हवाला: गठबंधन ने दावा किया है कि मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फॉर्म 6 और एसआईआर (SIR) प्रक्रियाओं में बदलाव पर प्रशासनिक व क्षेत्रीय स्तर के कमिश्नरों ने अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बावजूद इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर बदलाव लागू किए गए।
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‘वोट चोरी’ का सीधा आरोप: विपक्षी नेताओं ने इसे ‘संवैधानिक डकैती’ करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से तुरंत देश के सामने सच स्वीकार करने और पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
इंडी ब्लॉक का राष्ट्रव्यापी एक्शन प्लान
सॉफ्टवेयर और मतदाता सूचियों में हेरफेर के इन्हीं गंभीर आरोपों को लेकर इंडी गठबंधन ने 2 अक्टूबर से 1 नवंबर तक व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की है:
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2 से 8 अक्टूबर: देश के सभी जिलों में ‘सेव डेमोक्रेसी’ (Save Democracy) मार्च और प्रदर्शन।
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6 अक्टूबर: इंडी गठबंधन के सभी सांसदों का निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग) तक पैदल मार्च।
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अक्टूबर दूसरा सप्ताह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की तैयारी।
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1 नवंबर: दिल्ली में ‘वोट चोरी’ और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर इंडी ब्लॉक की विशाल महारैली।
चुनाव आयोग का रुख
हालांकि, चुनाव आयोग पूर्व में यह स्पष्ट कर चुका है कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण और डिजिटल प्रक्रियाओं का अपडेशन पूरी तरह पारदर्शी, कानून-सम्मत और तकनीकी मानकों के अनुसार किया जाता है ताकि कोई भी फर्जी मतदाता सूची में शामिल न हो सके। लेकिन विपक्ष द्वारा सीधे CEC और सॉफ्टवेयर अपडेट प्रोसेस को निशाने पर लिए जाने से राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ राष्ट्रीय राजनीति, चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े इस बड़े घटनाक्रम पर अपनी निष्पक्ष और पैनी नजर बनाए हुए है।
