नर्सों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार
नर्सिंग सेवा का सर्वोच्च सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मु ने 15 स्वास्थ्य कर्मियों को ‘राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ से नवाजा
: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में देश के 15 नर्सिंग पेशेवरों को वर्ष 2026 के लिए ‘राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उन समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया है जिन्होंने निस्वार्थ सेवा और नर्सिंग के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है।
पुरस्कार की श्रेणी और स्वरूप
यह सम्मान नर्सिंग जगत के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पेशेवरों को प्रदान किया गया:
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किन्हें मिला सम्मान: पुरस्कार पाने वालों में पंजीकृत नर्सें, मिडवाइफ, सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) और महिला स्वास्थ्य आगंतुक (LHV) शामिल हैं।
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पुरस्कार में क्या मिला: प्रत्येक सम्मानित कर्मी को एक प्रशस्ति प्रमाण-पत्र, 1,00,000 (एक लाख रुपये) नकद और एक विशिष्ट पदक प्रदान किया गया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
समारोह के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव और स्वास्थ्य मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार का इतिहास
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स्थापना: इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की शुरुआत 1973 में भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई थी।
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उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य समाज के प्रति नर्सिंग कर्मियों की सराहनीय सेवाओं को मान्यता देना और उनके मनोबल को बढ़ाना है।
“सेवा और समर्पण की मिसाल”
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि नर्सिंग कर्मी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ हैं। उनका धैर्य, करुणा और समर्पण ही चिकित्सा जगत को मानवीय बनाता है। यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरी नर्सिंग बिरादरी के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक भी है।
(रिपोर्ट: सोनू कुमार पत्रकार):
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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