यूपी में समावेशी शिक्षा का सशक्तिकरण: ‘प्रशस्त 2.0’ ऐप के जरिए विशेष बच्चों की पहचान के लिए शिक्षकों को मिल रहा डिजिटल प्रशिक्षण
“उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा को नई दिशा: ‘प्रशस्त 2.0’ ऐप के जरिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों को दिया जा रहा डिजिटल प्रशिक्षण”
विशेष शिक्षा एवं सुशासन रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुगम और संवेदनशील बनाने के लिए निरंतर ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs – CWSN) की समय पर पहचान करने और उनकी विशिष्ट शैक्षिक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने के उद्देश्य से ‘प्रशस्त 2.0’ (PRASHAST 2.0) के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि इन बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा में बेहतर सीखने के अवसर मिल सकें।
1. ‘प्रशस्त 2.0’ पहल और इसका उद्देश्य
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दिव्यांग बच्चों की सुगम पहचान: ‘प्रशस्त’ ऐप और इसके उन्नत संस्करण ‘प्रशस्त 2.0’ का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की विभिन्न श्रेणियों (जैसे शारीरिक, मानसिक या अन्य दिव्यांगताएं) की वैज्ञानिक और समय पर पहचान करना है।
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डिजिटल माध्यम से शिक्षकों का सशक्तिकरण: इस अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे बच्चों की क्षमताओं और उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं का सही आकलन कर सकें।
2. समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर
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समान अवसर और सहभागिता: इस तकनीकी पहल से शिक्षकों को यह समझने में आसानी होती है कि किस बच्चे को किस प्रकार की विशेष शिक्षण पद्धति या सहायक उपकरणों की आवश्यकता है।
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नीतिगत प्रतिबद्धता: सरकार का यह प्रयास है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और हर छात्र को उसकी योग्यता के अनुसार बढ़ने का पूरा अवसर मिले।
3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: समावेशी विकास और सुशासन
शिक्षा समाज के बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम है। जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जाता है, तभी वास्तविक विकास और सुशासन की परिकल्पना साकार होती है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह डिजिटल पहल शिक्षा के क्षेत्र में संवेदनशीलता और आधुनिकता का एक बेहतरीन समन्वय है।
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