चुनाव आयोग विवाद: डॉ. सिंघवी ने उठाए तीखे सवाल
“तीन सदस्यीय आयोग में मतभेद और उठते संवैधानिक सवाल”: ‘फॉर्म-6’ विवाद पर डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने साधा निशाना; ERO पोर्टल एक्सेस और अपीलों पर घेरा
नई दिल्ली: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया खोजी रिपोर्ट के बाद भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के भीतर का अंदरूनी विवाद अब देश के शीर्ष कानूनी और राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के लॉ, आरटीआई एवं ह्यूमन राइट्स विभाग के चेयरमैन डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, मतदाता पंजीकरण से जुड़े ‘फॉर्म-6’ में बदलावों और डिजिटल पोर्टल एक्सेस को लेकर केंद्र सरकार व मुख्य चुनाव आयुक्त पर करारा हमला बोला है।
आयोग के दो वरिष्ठ चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कई नीतिगत फैसलों को लिखित रूप में “अनधिकृत और गैर-कानूनी” (unauthorised and illegal) बताए जाने के बाद बहु-सदस्यीय संस्था के औचित्य पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
फॉर्म-6, ERO पोर्टल और पश्चिम बंगाल अपील: सिंघवी के मुख्य आरोप
डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और विपक्षी नेताओं ने फाइलों में दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए मुख्य रूप से तीन गंभीर प्रशासनिक मुद्दों को रेखांकित किया है:
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‘फॉर्म-6’ में अनधिकृत बदलाव: नए मतदाताओं के पंजीकरण हेतु इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कानूनी प्रक्रिया (गैजेट नोटिफिकेशन) को दरकिनार कर बदलाव किए गए। चुनाव आयुक्त संधू ने 13 अगस्त के अपने आधिकारिक नोट में इसे पूरी तरह “अनधिकृत और गैर-कानूनी” करार दिया था।
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इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) का पोर्टल एक्सेस: डिजिटल सिस्टम (ERONet/ECINET) के केंद्रीकरण के कारण स्थानीय स्तर के EROs (जैसे SDM या तहसीलदार) के अधिकारों और एक्सेस पर पड़े प्रभाव को लेकर दोनों आयुक्तों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।
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पश्चिम बंगाल मामले में अपील पर विवाद: पश्चिम बंगाल से जुड़े कानूनी मामलों में आयोग की ओर से की गई अपीलों को लेकर भी दोनों आयुक्तों की राय अलग थी, जिसे बिना आयोग की पूर्ण बैठक (Full Commission Meeting) की मंजूरी के आगे बढ़ा दिया गया।
“क्या बाकी ECs डमी हैं?” – संवैधानिक व्यवस्था पर सीधा हमला
आयोग के भीतर बहुमत (Majority) की स्थापित प्रणाली के उल्लंघन को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने संवैधानिक सवाल उठाए हैं:
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तीन सदस्यीय आयोग की संरचना पर प्रश्न: डॉ. सिंघवी ने सवाल उठाया कि जब तीन में से दो चुनाव आयुक्त (जो स्वयं बहुमत बनाते हैं) बार-बार फैसलों पर आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं, तो आयोग में सर्वसम्मति की संवैधानिक भावना कहाँ है? क्या अन्य आयुक्तों की भूमिका को गौण कर दिया गया है?
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संस्थागत निष्पक्षता की रक्षा: विपक्षी दलों ने मांग की है कि आयोग के भीतर निर्णय लेने की सर्वसम्मत व पारदर्शी व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए, ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की साख पर कोई सवाल न उठे।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और उनके भीतर पूर्ण निष्पक्षता व आंतरिक लोकतंत्र का निष्पक्ष समर्थन करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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