ED की बड़ी कार्रवाई: ठगी का आरोपी अरेस्ट
ED का बड़ा एक्शन: अमेरिका में $1.5 करोड़ की ठगी करने वाले इंटरनेशनल कॉल सेंटर स्कैम का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
गुरुग्राम: दिल्ली-NCR में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी कामयाबी मिली है। ED की गुरुग्राम जोनल यूनिट ने इस रैकेट के मुख्य आरोपी चंद्र प्रकाश गुप्ता को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है।
हेडलाइन: ₹100 करोड़ की संपत्ति और लग्जरी कारों का जखीरा बरामद
इस केस की जांच के दौरान ED ने दिल्ली-NCR में 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जो संपत्तियां और सामान बरामद हुए, वे होश उड़ाने वाले हैं:
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कीमती जेवर: ₹1.75 करोड़ के सोने-चांदी के आभूषण।
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लग्जरी गाड़ियाँ: 4 हाई-एंड लग्जरी कारें।
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महंगी घड़ियाँ: 8 इंटरनेशनल ब्रांड की लग्जरी घड़ियाँ।
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नकदी: ₹10 लाख से अधिक कैश और कई डिजिटल डिवाइस।
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अवैध शराब: छापेमारी में 220 से अधिक विदेशी शराब की बोतलें भी मिलीं, जिसके बाद एक्साइज विभाग ने अलग से FIR दर्ज की है।
कैसे होता था ठगी का खेल? (Modus Operandi)
जांच में खुलासा हुआ कि नोएडा और गुरुग्राम में अवैध कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। ठगी का तरीका बेहद शातिर था:
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फेक माइक्रोसॉफ्ट अलर्ट: अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर नकली ‘माइक्रोसॉफ्ट सुरक्षा चेतावनी’ भेजी जाती थी।
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रिमोट एक्सेस: मदद के बहाने पीड़ितों को TeamViewer या AnyDesk जैसे सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए उकसाया जाता था।
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कंट्रोल और डेटा चोरी: एक बार एक्सेस मिलते ही आरोपी पीड़ितों के बैंकिंग विवरण और निजी जानकारी चुरा लेते थे।
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फेडरल रिजर्व के नाम पर डर: हैकिंग का डर दिखाकर पीड़ितों से उनका पैसा फर्जी सुरक्षित खातों (जो असल में स्कैमर्स के थे) में ट्रांसफर करा लिया जाता था।
क्रिप्टोकरेंसी और हांगकांग कनेक्शन
ठगी के पैसे (Proceeds of Crime) को पहले हांगकांग के बैंक खातों में भेजा जाता था। वहां से इसे क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया और फिर कई शेल कंपनियों के जरिए वापस भारत लाकर सफेद किया गया। नवंबर 2022 से अप्रैल 2024 के बीच इस गैंग ने करीब $1.5 करोड़ (लगभग ₹125 करोड़) की ठगी की है।
मुख्य आरोपी फरार, तलाश जारी
ED के मुताबिक, चंद्र प्रकाश गुप्ता जुलाई 2024 से ही फरार था। कोर्ट ने उसे 24 दिसंबर 2025 तक ED की कस्टडी में भेजा है। हालांकि, इस घोटाले के अन्य मास्टरमाइंड अर्जुन गुलाटी, अभिनव कालरा और दिव्यांश गोयल अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है। अब तक इस गिरोह की ₹100 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है।
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