ईडी ने सेंट्रल बैन के ₹169 करोड़ लौटाए
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को मिली बड़ी राहत, ED ने ₹169.47 करोड़ की कुर्क संपत्ति लौटाई
कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED), कोलकाता ज़ोनल कार्यालय ने मेसर्स प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड (M/s Prakash Vanijya Private Limited) और उसके प्रमोटर-निदेशक मनोज कुमार जैन से जुड़े एक प्रमुख बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। यह समूह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को ₹234.57 करोड़ का चूना लगाने में शामिल था।
ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जाँच पूरी करते हुए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को ₹169.47 करोड़ मूल्य की कुर्क संपत्ति वापस दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कार्रवाई सार्वजनिक धन की वसूली सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्या थी धोखाधड़ी?
ED की जाँच में पता चला कि मनोज कुमार जैन ने अपनी कंपनी, प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड, के लिए फर्जी दस्तावेज़ों और बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई वित्तीय विवरणों के आधार पर ऋण सुविधाएँ (Credit Facilities) प्राप्त कीं। इसके बाद, ऋण राशि को अवैध रूप से मोड़ दिया गया, जिससे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को ₹234.57 करोड़ का भारी नुकसान हुआ।
इस मामले में, ED ने पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में स्थित ₹199.67 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को चार अलग-अलग अनंतिम कुर्की आदेशों (Provisional Attachment Orders) के तहत कुर्क किया था, जिसे बाद में न्याय निर्णायक प्राधिकारी (Adjudicating Authority) ने पुष्टि कर दी थी।
ED की पहल और संपत्ति की वापसी
सार्वजनिक हित की रक्षा और बैंक फंड की वसूली सुनिश्चित करने के लिए, ED ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं।
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बैंक की याचिका: बैंक ने कुर्क संपत्तियों की वापसी (Restitution) के लिए याचिका दायर की।
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ED का समर्थन: ED ने एक सहमति याचिका (Consent Petition) दाखिल कर बैंक की मांग का समर्थन किया।
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कोर्ट का फैसला: 28.11.2025 को, माननीय मुख्य न्यायाधीश, सिटी सेशंस कोर्ट, कलकत्ता ने कुर्क संपत्तियों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को वापस करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि बैंक वैध रूप से अपने बकाए की वसूली का हकदार है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा किए गए नवीनतम मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों का वर्तमान वसूली योग्य मूल्य (Realizable Value) ₹169.47 करोड़ है।
यह कार्रवाई न केवल वित्तीय धोखाधड़ी से प्राप्त धन को सही दावेदारों को वापस दिलाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह जटिल वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करने और बैंकिंग प्रणाली की अखंडता को बहाल करने की ED की प्रतिबद्धता को भी मज़बूत करता है।

