चुनाव आयोग में मतभेद: 2 आयुक्तों ने उठाए सवाल
“चुनाव आयोग के भीतर अभूतपूर्व मतभेद”: सीईसी के फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने 14 बार दर्ज कराई लिखित आपत्ति; विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक विस्तृत खोजी रिपोर्ट के बाद भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान आयोग द्वारा लिए गए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों और संशोधनों पर चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आधिकारिक फाइलों में लगभग 14 बार अपनी लिखित असहमति दर्ज कराई है।
आयोग के तीन में से दो आयुक्तों द्वारा फैसलों को “अनधिकृत और गैर-कानूनी” (unauthorised and illegal) करार दिए जाने के बाद संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर बहस छिड़ गई है।
किन फैसलों पर दर्ज हुई आपत्ति? जानिए मुख्य बिंदु
खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कई प्रमुख नीतिगत और तकनीकी फैसलों पर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं:
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प्रशासनिक व नियम संशोधन: मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म (जैसे फॉर्म-6) में बदलाव, डिजिटल सिस्टम (ERONet) के केंद्रीकरण तथा मतदाता सूचियों (Electoral Rolls) के संशोधन से जुड़े कई आदेशों पर सहमति नहीं थी।
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बहुमत की अनदेखी का आरोप: दोनों आयुक्तों ने फाइलों पर स्पष्ट लिखा कि ये निर्णय उनकी बिना जानकारी, पूर्व सहमति या आधिकारिक मंजूरी के जारी किए गए, जो कि आयोग की स्थापित परंपराओं के विपरीत है।
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संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन: नियमानुसार तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसले सर्वसम्मति या फिर बहुमत (Majority) के आधार पर लिए जाने चाहिए। जब दो आयुक्तों (जो स्वयं बहुमत बनाते हैं) ने ही फैसलों पर सवाल उठाए हैं, तो इससे निर्णय प्रक्रिया की वैधता पर कानूनी प्रश्न खड़े होते हैं।
राजनीतिक घमासान और आधिकारिक रुख
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है:
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विपक्ष का हमला: कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) सहित अन्य विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि आयोग के भीतर संवैधानिक प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर बाहरी राजनीतिक दबाव में फैसले थोपे जा रहे हैं।
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आधिकारिक चुप्पी: इस पूरे घटनाक्रम और उठे सवालों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यालय अथवा सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ देश की लोकतांत्रिक नींव को मजबूत रखने के लिए निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं में पूर्ण पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और निष्पक्षता बनाए रखने का पुरजोर समर्थन करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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