Delhi : लाल किले के प्रांगण से अविस्मरणीय क्षण
दिल्ली का लाल किला, जिसने सदियों से भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजकर रखा है, वहीं से इस वर्ष मुझे 103 वर्ष पुरानी श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में शामिल होने और उद्बोधन करने का सौभाग्य मिला।
यह रामलीला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है और वर्तमान में श्री धीरज धर गुप्ता जी एवं उनका परिवार इसके संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मैं उन्हें और सभी समर्पित कार्यकर्ताओं को हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ देता हूँ, जो भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा में निरंतर लगे हुए हैं।

इस भव्य आयोजन में उपस्थित अपार जनसमूह, विशेषकर मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि –परिवार की जड़ों में धर्म और संस्कृति को जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी माँ, बहन, दादी-नानी, ताई-बुआ जैसी महिलाओं की है।
जब तक हम आने वाली पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से नहीं जोड़ेंगे, समाज का संतुलन अधूरा रहेगा।
रामलीला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं से जीवन जीने की प्रेरणा है। यह हमें धर्म, आस्था और संस्कारों को व्यवहार में उतारने का मार्ग दिखाती है।

लाल किले जैसे ऐतिहासिक धरोहर से इस पावन अवसर पर उद्बोधन करना मेरे लिए वास्तव में एक रोमांचक और अविस्मरणीय अनुभव रहा। यह स्थल न केवल राजनीति और इतिहास का साक्षी है, बल्कि सनातन संस्कृति की भी अमूल्य यादें समेटे हुए है।
श्री धार्मिक लीला कमेटी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी शुभेच्छुओं को मैं हृदय से धन्यवाद और शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
ब्यूरो रिपोर्ट आल राइट्स मैगज़ीन
