हॉकी टीम की भगवा जर्सी पर विवाद
एफआईएच वर्ल्ड कप में ‘केसरिया’ जर्सी में नज़र आएंगी भारतीय हॉकी टीमें; बवाल के बीच हॉकी इंडिया ने बताई रंग बदलने की वजह
रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)
अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की किट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आगामी वर्ल्ड कप मुकाबलों में भारतीय हॉकी टीमें अपनी दशकों पुरानी पारंपरिक नीली जर्सी (Blue Kit) के बजाय नए ‘केसरिया’ (भगवा) रंग की जर्सी में मैदान पर उतरेंगी।
सोशल मीडिया और खेल जगत में इस नए बदलाव को लेकर छिड़ी बहस और हंगामे के बीच हॉकी इंडिया (Hockey India) ने आधिकारिक बयान जारी कर जर्सी का रंग बदलने के पीछे का मुख्य कारण स्पष्ट किया है।
क्यों बदला गया जर्सी का रंग? हॉकी इंडिया की सफाई
हॉकी इंडिया के अनुसार, जर्सी के रंग में यह बदलाव किसी भी राजनीतिक या धार्मिक भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मानकों और नियमों के तहत लिया गया एक तकनीकी निर्णय है:
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‘अवे किट’ (Away Kit) का नियम: अंतरराष्ट्रीय खेल संघों के नियमानुसार, जब दो टीमों की प्राथमिक जर्सी का रंग एक जैसा होता है, तो भ्रम से बचने के लिए दूसरी टीम को ‘अवे किट’ (वैकल्पिक जर्सी) पहननी पड़ती है।
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समान रंगों का टकराव: कई विरोधी टीमों (जैसे फ्रांस, इटली आदि) की प्राथमिक जर्सी का रंग भी नीला ही होता है। मैदान पर खिलाड़ियों और रेफरी को दूर से स्पष्ट रूप से पहचानने में सहूलियत रहे, इसलिए हॉकी इंडिया ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के मुख्य रंग ‘केसरिया’ को अल्टरनेटिव (अवे) जर्सी के रूप में चुना है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
हॉकी टीमों के नए लुक को लेकर फैंस और खेल प्रेमियों के बीच दोहरी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहाँ कई लोग भारतीय तिरंगे के प्रमुख रंग ‘केसरिया’ को एक नया ऊर्जावान प्रतीक मान रहे हैं, वहीं कुछ खेल प्रेमी इसे भारतीय खेलों की पुरानी पहचान ‘मेन इन ब्लू’ (Men in Blue) की परंपरा से अलग बता रहे हैं।
फिलहाल, टीम इंडिया अपनी नई किट के साथ आगामी वर्ल्ड कप अभियानों में अपनी चुनौती पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

