नोटबंदी व UPI पर कांग्रेस का सरकार पर वार
नोटबंदी, GST और UPI शुल्क पर कांग्रेस का बड़ा हमला: “आर्थिक निर्णयों से देश की अर्थव्यवस्था पस्त” — सुप्रिया श्रीनेत
नई दिल्ली: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता ने नोटबंदी (Demonetisation), जीएसटी (GST) की जटिलताओं, देश में नकद अर्थव्यवस्था (Cash in Economy) की स्थिति और हाल ही में यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट शुल्कों से जुड़े फैसलों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण देश की अर्थव्यवस्था आज तक झटके से उबर नहीं पाई है।
कांग्रेस के प्रमुख आरोप और मुख्य बिंदु
पत्रकार वार्ता के दौरान सुप्रिया श्रीनेत ने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए:
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नोटबंदी का असर: वर्ष 2016 में लागू की गई नोटबंदी के फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था और असंगठित क्षेत्र (Informal Sector) को गहरा झटका लगा, जिससे देश आज तक नहीं उबर सका है।
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GST की जटिलताएं: माल एवं सेवा कर (GST) के त्रुटिपूर्ण और जटिल स्वरूप के कारण सरकार को बार-बार नियमों व दरों में संशोधन (विभिन्न वर्जन) करने पड़े, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं।
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नकद अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी: सरकार ने डिजिटल इंडिया का हवाला देते हुए कैश-इन-इकोनॉमी कम होने का दावा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि बाजार में नकद (Cash in Circulation) पहले से ढाई गुना से अधिक बढ़ चुका है।
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UPI शुल्क का विरोध: डिजिटल भुगतानों और UPI पर नए मर्चेंट शुल्क (MDR) लगाने की खबरों को कांग्रेस ने “बेवकूफी भरा फैसला” करार दिया है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकार अपने ही समर्थकों और घटक दलों की सलाह मानते हुए इस जन-विरोधी फैसले को तुरंत वापस ले।
राजनीतिक घमासान और आर्थिक बहस
विपक्ष का मानना है कि डिजिटल पेमेंट्स और आम बाजार को लगातार नए करों व शुल्कों के दायरे में लाकर आम जनता और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है।
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व्यापारिक समुदाय में चिंता: छोटे दुकानदारों और एमएसएमई (MSME) सेक्टर में डिजिटल भुगतानों पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने की आशंका से असमंजस का माहौल है।
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विपक्ष की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने के लिए UPI सेवाओं को पूरी तरह से नि:शुल्क और सर्वसुलभ ही रखा जाना चाहिए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि देश के आर्थिक विकास और पारदर्शी व्यापार तंत्र के लिए पक्ष-विपक्ष के बीच जन-हितैषी आर्थिक नीतियों पर खुला और संवादपरक विमर्श होना आवश्यक है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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