“युवाओं की नौकरी का दीया कब जलेगा?”: बड़ा सवाल
“पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीया तो जला, लेकिन युवाओं की नौकरी का दीया कब जलेगा?”: रोजगार के मुद्दे पर उठी युवाओं की बुलंद आवाज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस और ‘सेवा पखवाड़े’ के तहत देशभर में कई उत्सव और ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जहां एक ओर समर्थकों और नेताओं द्वारा दीये जलाकर और दीप प्रज्वलित कर शुभकामनाएं दी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों पर एक तीखा और वाजिब सवाल पूछना शुरू कर दिया है— “मोदी जी, आपके जन्मदिन का दीया तो जल गया, लेकिन हम युवाओं की नौकरियों और भविष्य का दीया कब जलेगा?”
सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रमों के बीच देश का युवा वर्ग अब अपनी प्राथमिकताओं और आर्थिक सुरक्षा को लेकर अपनी आवाज बेबाकी से उठा रहा है।
उत्सव बनाम करियर का संकट: युवाओं का तीखा सवाल
देश के विभिन्न राज्यों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और डिग्री धारकों का मानना है कि उत्सवों और प्रतीकात्मक अभियानों के साथ-साथ युवाओं के भविष्य की सुध लेना भी बेहद जरूरी है:
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अटकी भर्तियां और खाली पद: रेलवे, एसएससी, बैंक, रक्षा और विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों (State PSCs) में लाखों सरकारी पद वर्षों से खाली पड़े हैं या उनकी प्रक्रिया अदालती मुकदमों और प्रशासनिक देरी के कारण अटकी हुई है।
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उम्र सीमा का बढ़ता दबाव: समय पर परीक्षाएं न होने और परिणामों में देरी के कारण लाखों अभ्यर्थियों की निर्धारित आयु सीमा (Age Limit) समाप्त हो रही है, जिससे उनका सालों का परिश्रम संकट में पड़ गया है।
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‘दीया नहीं, नियुक्ति पत्र चाहिए’: युवाओं का स्पष्ट कहना है कि प्रतीकात्मक दीये या वादे नहीं, बल्कि उनके हाथों में योग्यता के अनुसार समयबद्ध ‘जॉइनिंग लेटर’ (Appointment Letters) मिलना ही उनके जीवन का असली उजाला होगा।
जॉब मार्केट चमकाने की मांग तेज
छात्र संगठनों और युवा अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि किसी भी देश की असली समृद्धि और शक्ति उसके रोजगारयुक्त युवाओं में निहित है:
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पारदर्शी और निश्चित भर्ती कैलेंडर: युवा मांग कर रहे हैं कि यूपीएससी (UPSC) की तर्ज पर सभी केंद्रीय व राज्य भर्ती बोर्डों के लिए एक निश्चित वार्षिक कैलेंडर जारी हो और परीक्षा से लेकर जॉइनिंग तक की समय-सीमा तय की जाए।
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पेपर लीक पर कड़ा प्रहार: लगातार होने वाले पेपर लीक और धांधली के मामलों में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि ईमानदार और मेधावी छात्रों का हक न मारा जाए।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि देश के युवाओं की यह पुकार अत्यंत प्रासंगिक है। सरकार को उत्सवों के साथ-साथ देश के करोड़ों शिक्षित युवाओं के रोजगार के दीये को तुरंत और पारदर्शी तरीके से रोशन करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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