ढह रहे ‘कूड़े के पहाड़’: बदलती दिल्ली पर क्या बोले नागरिक
“कूड़े के पहाड़” से मुक्ति की ओर दिल्ली: भलस्वा, ओखला और गाजीपुर में ढहते कचरे के टीलों पर क्या कह रहे हैं दिल्लीवासी
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के क्षितिज पर दशकों से बदनुमा दाग की तरह खड़े “कूड़े के पहाड़” (गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट्स) अब धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमटते नजर आ रहे हैं। दिल्ली नगर निगम (MCD) और राज्य प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे व्यापक बायो-माइनिंग (Biomining) अभियान और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के चलते इन कचरे के पहाड़ों की ऊंचाई में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
वर्षों से दुर्गंध, जहरीले धुएं और आग लगने की घटनाओं से जूझ रहे दिल्लीवासियों के लिए यह बदलाव न केवल राहत की सांस लेकर आया है, बल्कि ‘स्वच्छ भारत’ और ‘विकसित दिल्ली’ के संकल्प को भी मजबूती दे रहा है।
तस्वीरों में बदलती दिल्ली: धरातल पर क्या है स्थिति?
दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) को आधुनिक स्वरूप देने के लिए बायो-माइनिंग की दैनिक क्षमता को बढ़ाकर 25,000 से 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है।
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भलस्वा और ओखला का कायाकल्प: भलस्वा और ओखला में बायो-माइनिंग के जरिए लाखों मीट्रिक टन पुराना (Legacy Waste) कचरा साफ किया जा चुका है और करीब 100 एकड़ से अधिक जमीन को पुन: हासिल (Land Reclamation) किया गया है। इन साइट्स को 2026 के अंत तक पूरी तरह समतल करने का लक्ष्य रखा गया है।
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गाजीपुर लैंडफिल पर वैज्ञानिक प्रहार: देश की सबसे बड़ी डंपसाइट्स में से एक गाजीपुर में भी ट्रॉमल मशीनों की संख्या बढ़ाकर वैज्ञानिक निस्तारण की गति तेज की गई है, जिसे 2027 तक साफ करने की दिशा में कार्य जारी है।
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वेस्ट-टू-एनर्जी और साइंटिफिक रिसाइकिलिंग: कचरे से बिजली बनाने और सीएंडडी (C&D) वेस्ट का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे में करने से लैंडफिल पर रोजाना पहुंचने वाले ताजे कचरे का दबाव कम हुआ है।
दिल्लीवासियों की जुबानी: क्या कह रहे हैं नागरिक?
आस-पास की कॉलोनियों और क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव जीवन की गुणवत्ता में सीधे सुधार जैसा है:
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“जहरीले धुएं और बदबू से आजादी”: भलस्वा और गाजीपुर के आसपास रहने वाले स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले गर्मी के दिनों में लैंडफिल में लगने वाली भीषण आग और जहरीले धुएं से सांस लेना दूभर हो जाता था। अब पहाड़ों की घटती ऊंचाई और कचरे के निस्तारण से हवा की गुणवत्ता और आसपास के माहौल में स्पष्ट सुधार दिख रहा है।
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“जमीन और संपत्ति के दामों में सुधार”: जीटी करनाल रोड, ओखला और ईस्ट दिल्ली के निवासियों के अनुसार, कचरे के पहाड़ हटने से न केवल क्षेत्र की सुंदरता लौट रही है, बल्कि वर्षों से उपेक्षित पड़ी जमीन का मूल्य भी बढ़ रहा है।
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“भविष्य के इको-पार्क की उम्मीद”: लैंडफिल साइट्स के साफ होने के बाद वहां प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट और इको-पार्क की योजनाओं ने दिल्ली के पर्यावरण प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगाई है।
पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान की ओर बढ़ते कदम
प्रशासन द्वारा तय की गई समय-सीमा के अनुसार, वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण तकनीक से दिल्ली को कूड़े के टीलों से स्थायी मुक्ति दिलाने का प्रयास जारी है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ दिल्ली के पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले इस वृहद सफाई अभियान की सराहना करती है और उम्मीद करती है कि नागरिकों और प्रशासन के साझे प्रयासों से दिल्ली स्वच्छ और हरित पहचान बनाए रखेगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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