सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना: लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक (B-30) पर अवैध अतिक्रमण का तांडव, जनता का राह चलना हुआ दूभर
“सुप्रिम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना: लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक (B-30) पर अवैध अतिक्रमण से जनता पस्त, प्रशासन और पुलिस मौन”
विशेष खोजी एवं प्रशासनिक रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
दिल्ली / लक्ष्मी नगर: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के कड़े निर्देशों और बार-बार के आदेशों के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही का नंगा नाच जारी है। स्थिति यह है कि खुद देश की राजधानी दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की सरेआम अवहेलना की जा रही है।
पूर्वी दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक (B-30 के समीप) इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जहां अवैध छोले-कुलचे के ठेले और सड़क पर फैल रहे अवैध ‘ओपन-एयर रेस्तरां’ ने आम जनता का राह चलना मुहाल कर दिया है।
1. सुप्रीम कोर्ट के अतिक्रमण विरोधी जजमेंट और सरेआम अवहेलना
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सर्वोच्च अदालत के कड़े निर्देश: माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने अपने ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक सड़कें, गलियां और फुटपाथ केवल और केवल पैदल चलने वालों और निर्बाध यातायात के लिए हैं। अदालत ने अवैध कब्जों को तुरंत हटाने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के सख्त आदेश दिए हैं।
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जमीन पर धज्जियां: दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय स्थित है, वहीं स्थानीय स्तर पर इन न्यायसंगत आदेशों की सरेआम अवहेलना की जा रही है। B-30 सुभाष चौक के पास सड़कों पर हो रहे अवैध कब्जे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्रशासन और स्थानीय माफियाओं के आगे कानून के आदेश कितने बेबस हो चुके हैं।
2. B-30 के पास कैसे चल रहा है अराजकता का खेल?
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सड़क बनी निजी रेस्तरां: B-30 संपत्ति के मालिकों की कथित शह और संरक्षण के कारण अवैध कब्जाधारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने चलती सड़क को ही खाने-पीने का अड्डा बना दिया है। गाड़ियां और ठेले सड़क के बीचों-बीच खड़े किए जाते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है।
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आम जनता की परेशानी: बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। जरा सी चूक बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, लेकिन नगर निगम (MCD) और ट्रैफिक पुलिस की उदासीनता के कारण इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: कानून और न्याय सर्वोपरि
न्यायपालिका के आदेशों का पालन करना हर सरकारी तंत्र और नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। यदि सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह अवैध कब्जा कर अदालतों के आदेशों को ठेंगा दिखाया जाएगा, तो आम जनता का शासन-प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए मांग करती है कि तत्काल प्रभाव से सुभाष चौक (B-30) को अतिक्रमण मुक्त किया जाए और आदेशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए।
