बिहार संग्रहालय बना देश का रोल मॉडल

बिहार संग्रहालय बना देश का रोल मॉडल: 1 साल में पहुंचे 5 लाख से अधिक दर्शक; 7-10 अगस्त को मनेगा भव्य स्थापना दिवस, सीएम सम्राट चौधरी के 5 बड़े निर्देश

पटना (बिहार):

बिहार संग्रहालय (Bihar Museum) ने देश भर में कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अपनी बेहतरीन विशेषज्ञता और आधुनिक कला दीर्घाओं के दम पर यह देश भर के संग्रहालय विकास का रोल मॉडल बन गया है। पिछले वर्ष 5 लाख से अधिक टिकटधारी आगंतुकों (पेड विजिटर्स) का रिकॉर्ड दर्ज करने के बाद, अब आगामी 7 से 10 अगस्त 2026 तक बिहार संग्रहालय का भव्य स्थापना दिवस समारोह आयोजित होने जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज बिहार संग्रहालय समिति की शासी निकाय (Governing Body) की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान संग्रहालय के महानिदेशक श्री अंजनी कुमार सिंह ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि दिल्ली, गुजरात, ओडिशा और तेलंगाना सहित देश के 9 प्रमुख संग्रहालयों की स्थापना और उनके विकास में बिहार संग्रहालय समिति ने मार्गदर्शक (अहम भूमिका) के रूप में कार्य किया है। सीएम ने इस विशेषज्ञता और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा की सराहना की।

🏛️ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 5 बड़े और महत्वपूर्ण निर्देश

संग्रहालय को वैश्विक पटल पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को पांच मुख्य निर्देश जारी किए:

1. बिहार की लोककला और लोकसंस्कृति को मिलेगा बड़ा मंच

  • सांस्कृतिक पहचान: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संग्रहालय की द्विवार्षिक गतिविधियों (Biennial Activities) और आगामी सभी कार्यक्रमों में बिहार की समृद्ध लोककला, लोकसंस्कृति और लोक परंपराओं को प्रमुखता से शामिल किया जाए, क्योंकि लोक परंपराएं ही राज्य की असली सांस्कृतिक पहचान हैं।

2. भव्य और ऐतिहासिक होगा स्थापना दिवस समारोह

  • तैयारियां शुरू: 7 अगस्त से 10 अगस्त 2026 तक चलने वाले स्थापना दिवस समारोह को बेहद भव्य और प्रभावी रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। इस चार दिवसीय समारोह में बिहार की ऐतिहासिक उपलब्धियां, गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

3. रोजगार के लिए शुरू होंगे टूर गाइड और डिजाइन के डिप्लोमा कोर्स

  • युवाओं को मिलेगा मौका: पर्यटन, कौशल विकास (Skill Development) और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय पर विचार हुआ। संग्रहालय में अब टूर गाइड, डिजाइनिंग और लोक कलाओं से संबंधित विशेष डिप्लोमा पाठ्यक्रम (Diploma Courses) प्रारंभ करने की योजना पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया है। इससे संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

4. संग्रहालय को बनाएं ‘ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र’

  • सिर्फ प्रदर्शन की जगह नहीं: मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि बिहार की पहचान, गौरव और ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र है। इसे संस्कृति, शिक्षा और पर्यटन के एक प्रमुख हब के रूप में निरंतर विकसित किया जाए।

5. छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष कार्ययोजना

  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं (Researchers) और विदेशी पर्यटकों के लिए संग्रहालय को और अधिक उपयोगी, ज्ञानवर्धक तथा आकर्षक बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए बिहार की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी।

👥 बैठक में शामिल रहे राज्य के शीर्ष अधिकारी

इस महत्वपूर्ण शासी निकाय की बैठक में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के कई मंत्री और शीर्ष नौकरशाह मौजूद रहे, जिनमें कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री अजय यादव, शिक्षा विभाग के सचिव श्री विनोद सिंह गुंजियाल और मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।


रिपोर्ट: नरेश अग्रवाल,पटना

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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