बरेली: कोचिंग बंदी पर उठे सवाल
जनता की आवाज़: कोचिंग बंदी पर उठे सवाल, अवैध अस्पतालों और होटलों पर भी हो कड़ी कार्रवाई
बरेली: लखनऊ में हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद बरेली जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले कई कोचिंग संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद (सीलिंग की कार्रवाई) कर दिया गया है। प्रशासन के इस कड़े कदम से जहां एक तरफ हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता और बुद्धिजीवियों के बीच इस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं।
सुरक्षा मानक जरूरी, पर क्या कार्रवाई में भेदभाव है?
सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक आम जनता इस मुद्दे पर अपनी राय रख रही है। नागरिकों का कहना है कि छात्रों की जान की सुरक्षा के लिए प्रशासन का यह एक बेहद सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है। कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट (निकासी द्वार) और वेंटिलेशन जैसे कड़े मानक हर हाल में पूरे होने चाहिए।
लेकिन, इसके साथ ही जनता यह सवाल भी उठा रही है कि:
क्या केवल कुछ चुनिंदा या छोटे कोचिंग संस्थानों पर ही गाज गिराई जा रही है? क्या शहर में चल रहे बड़े और रसूखदार बाहरी कोचिंग संस्थानों के सभी मानक 100% पूरे हैं, या इस पूरी कार्रवाई के पीछे कोई प्रशासनिक भेदभाव या ढिलाई बरती जा रही है? इसकी भी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।
अवैध अस्पताल, होटल और अन्य प्रतिष्ठानों पर भी हो एक्शन
‘जनता की आवाज़’ (#JantaKiAwaaz) के तहत नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन को अपनी इस पैनी नजर और सख्त कार्रवाई का दायरा केवल कोचिंग सेंटरों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। शहर के भीतर कई ऐसे संवेदनशील क्षेत्र हैं जहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
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अवैध अस्पताल और क्लीनिक: शहर के रिहायशी इलाकों और संकरी गलियों में बिना फायर एनओसी (NOC) और बिना प्रशिक्षित स्टाफ के दर्जनों अवैध अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
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होटल और लॉज: रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य बाजारों के पास बने कई होटलों में न तो आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता।
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व्यावसायिक प्रतिष्ठान: शहर के कई बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बेसमेंट में चल रही दुकानें भी नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के एक बार इन सभी अवैध होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी सघन जांच करनी चाहिए। समय रहते की गई यह कठोर कार्रवाई भविष्य में किसी भी बेगुनाह की जान जाने से रोक सकती है।
मयंक शुक्ला
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
(एडिटर (Allrights Magazine)

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