Bareilly Fake Marksheet Racket: 6 महीने में 3 साल की बीए डिग्री देने वाले फर्जी रैकेट का भंडाफोड़; नागालैंड और गढ़वाल यूनिवर्सिटी से हो रहा सत्यापन
“बरेली में फर्जी मार्कशीट और डिग्री रैकेट का पर्दाफाश: 6 महीने में 3 साल की बीए डिग्री देने वाले नेटवर्क की जांच तेज, विश्वविद्यालयों से हो रहा सत्यापन”
विशेष अपराध एवं शिक्षा माफिया रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े और मार्कशीट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। यहां महज छह महीने में तीन साल की बीए (BA) की डिग्री और डिप्लोमा के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की तह तक जाने के लिए दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के नाम पर संचालित सेंटरों की कुंडली खंगाल रही है और विभिन्न विश्वविद्यालयों से अंकपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है।
1. क्या है पूरा फर्जीवाड़ा और कैसे हुआ खुलासा?
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डेस्टिनी एजुकेशन सेंटर पर छापा: पुलिस जांच के केंद्र में प्रदीप गंगवार का ‘डेस्टिनी एजुकेशन सेंटर’ है, जहां से छापेमारी के दौरान 21 संदिग्ध अंकपत्र (Marksheets) बरामद किए गए थे।
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6 महीने में 3 साल की डिग्री: शुरुआती जांच में यह हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह विद्यार्थियों को बिना परीक्षा दिए या न्यूनतम समय (महज छह महीने) में तीन साल की स्नातक (BA) और अन्य डिप्लोमा की फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराता था।
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विश्वविद्यालयों से सत्यापन: बरामद अंकपत्रों की वैधता की जांच के लिए पुलिस ने नागालैंड और गढ़वाल के विश्वविद्यालयों को पत्र भेजकर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही एक विशेष पुलिस टीम को नोएडा भी भेजा गया है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नोएडा के रहने वाले रामचरन से भी पूछताछ की जाएगी।
2. कौशल विकास योजना और डिस्टेंस लर्निंग की आड़ में खेल
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महर्षि दयानंद वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का कनेक्शन: पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी प्रदीप गंगवार ने डीडीपुरम इलाके में कौशल विकास योजना (Kaushal Vikas Yojana) के नाम पर डिस्टेंस लर्निंग सेंटर खोल रखा था। उसने इस सेंटर का पंजीकरण ‘महर्षि दयानंद वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट’ से करा रखा था।
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दिल्ली से जुड़े तार: इस फर्जी नेटवर्क के तार दिल्ली तक जुड़े हुए हैं। दिल्ली में संचालित उक्त इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर पवन गुप्ता हैं, जो मूल रूप से बरेली के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने पवन गुप्ता को थाने बुलाकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने सेंटर को अनुमति दिए जाने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन रैकेट में संलिप्तता की गहराई से जांच की जा रही है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ पर प्रहार
शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती है, बल्कि उन हजारों मेहनतकश और योग्य युवाओं के साथ धोखा है जो ईमानदारी से पढ़ाई कर आगे बढ़ना चाहते हैं। बरेली पुलिस द्वारा इस रैकेट के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई सराहनीय है। इस नेटवर्क से जुड़े हर एक छोटे-बड़े चेहरे को बेनकाब कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ शिक्षा जगत की अनियमितताओं, अपराध और प्रशासनिक खुलासों से जुड़ी हर खबर को पूरी प्रमाणिकता और निडरता के साथ अपने पाठकों तक पहुँचाती है।
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क्या आप बरेली में फर्जी मार्कशीट रैकेट चलाने वाले मुख्य आरोपियों पर दर्ज मुकदमों और धाराओं की विस्तृत कानूनी जानकारी चाहते हैं?
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क्या आप उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में सक्रिय इस प्रकार के फर्जी डिस्टेंस लर्निंग सेंटरों के खिलाफ शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियानों की रिपोर्ट पढ़ना चाहते हैं?
