आयुष्मान घोटाला: 4 अस्पताल ब्लैकलिस्ट

बरेली में आयुष्मान भारत योजना पर ‘फर्जीवाड़े’ का ग्रहण: 4 बड़े अस्पताल होंगे ब्लैकलिस्ट, गरीबों के हक पर डाका

बरेली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ में मुफ्त इलाज के नाम पर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। साचीज (SACHIS) की जांच में बरेली के चार प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। प्रशासन अब इन अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की तैयारी में है।


इन 4 अस्पतालों पर गिरेगी गाज

साचीज की टीम ने अपनी जांच में पाया कि इन अस्पतालों ने न केवल फर्जी कार्ड्स के जरिए सरकार को चूना लगाया, बल्कि लाभार्थियों के हक को भी मारा। रडार पर आए अस्पताल हैं:

  1. राधिका मैटरनिटी

  2. मेट्रो विजन

  3. उम्मीद हॉस्पिटल

  4. अरबन हॉस्पिटल

इन अस्पतालों ने हैक किए गए अकाउंट्स के जरिए बनाए गए फर्जी कार्ड्स पर ‘कागजी इलाज’ दिखाकर क्लेम वसूला। फिलहाल इन अस्पतालों का मामला मेडिकल कमेटी के पास है और इन्हें स्थाई रूप से प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया चल रही है।


हैक किए गए अकाउंट और फर्जी कार्ड का खेल

अक्टूबर माह में प्रदेश भर में करीब 450 से अधिक आयुष्मान कार्ड अवैध रूप से बनाए गए थे। जांच में सामने आया कि बरेली के इन अस्पतालों ने फर्जी लाभार्थियों के नाम पर इलाज दिखाकर सरकारी धन की हेराफेरी की। जिले में पहले भी आधार और यूजर आईडी में सेंध लगाकर फर्जी दस्तावेज बनाने के कई मामले (जैसे फरीदपुर और इज्जतनगर प्रकरण) सामने आ चुके हैं।


इलाज के नाम पर वसूली और लापरवाही: सनराइज हॉस्पिटल पर आरोप

फर्जीवाड़े के साथ-साथ निजी अस्पतालों की मनमानी का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। भमोरा निवासी लक्ष्मी देवी के अनुसार, उन्होंने अपने पति उर्वेश को सनराइज हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने उनसे इलाज के नाम पर करीब 5.50 लाख रुपये वसूल लिए।

इतना ही नहीं, महिला का आरोप है कि भारी रकम वसूलने के बाद भी इलाज में लापरवाही बरती गई, जिससे उनके पति की जान चली गई। अब इस मामले की जांच सीएमओ स्तर पर चल रही है और अस्पताल से वसूली गई राशि वापस दिलाने व कार्रवाई की तैयारी है।


व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

बरेली जिले में आयुष्मान योजना की पारदर्शिता अब सवालों के घेरे में है:

  • लक्ष्य बनाम हकीकत: जिले में 3.49 लाख परिवारों के कार्ड बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से 90% काम पूरा होने का दावा है। लेकिन फर्जीवाड़े ने इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर दाग लगा दिया है।

  • गरीबों की मजबूरी: पीड़ित अक्सर शिकायतों के चक्कर में थक जाते हैं और आखिर में अपनी हिम्मत हार जाते हैं।

  • सख्त जांच की दरकार: जानकारों का मानना है कि यदि शासन स्तर की स्पेशल टीम गहन जांच करे, तो करोड़ों का घपला उजागर हो सकता है।


न्यूज हाइलाइट्स

विवरण जानकारी
जांच एजेंसी साचीज (SACHIS)
मुख्य आरोप फर्जी आयुष्मान कार्ड, अवैध वसूली, कागजी इलाज
कार्रवाई 4 अस्पताल निलंबित, ब्लैकलिस्ट की तैयारी
बड़ी घटना सनराइज हॉस्पिटल में कार्ड के बावजूद 5.50 लाख की वसूली

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